मैथिली साहित्य से सजी यादगार शाम , पांच नई पुस्तकों का हुआ लोकार्पण कथा-संग्रह 'ऑक्सीजन' ने खूब बटोरी तालियां

Sonu Nigam18 October 20262 min read0 viewsबिहार
मैथिली साहित्य से सजी यादगार शाम , पांच नई पुस्तकों का हुआ लोकार्पण  कथा-संग्रह 'ऑक्सीजन' ने खूब बटोरी तालियां

बिहार के सुपौल जिला मुख्यालय स्थित भेलाही में शनिवार को साहित्य की एक शानदार शाम सजी। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. महेन्द्र के आवास पर 'किसुन संकल्प लोक' के तत्वावधान में एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मैथिली भाषा की पांच नई पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इस मौके पर जुटे साहित्यकारों ने मैथिली भाषा में कविता, कथा, अनुवाद और आलोचना के क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों की जमकर सराहना की और इसे भाषा की समृद्धि के लिए बेहद जरूरी बताया।

इन लेखकों की कृतियों ने खींचा सबका ध्यान

कार्यक्रम के दौरान पटना विश्वविद्यालय के रिटायर्ड प्रोफेसर और वरिष्ठ लेखक डॉ. इन्द्रकान्त झा की तीन महत्वपूर्ण कृतियों का विमोचन हुआ। इनमें उनका कथा-संग्रह 'ऑक्सीजन', मलयालम कविताओं का मैथिली अनुवाद 'मैथिलीक आंगनमे मलयालम कविताक पथार' और एक हाइकू-संग्रह शामिल है। वहीं, सुपौल के चकला निर्मली निवासी लेखक आशीष चमन के दो संग्रहों—कथा-संग्रह 'भरि रातिक कथा' और आलोचनात्मक निबंध-संग्रह 'शब्दक यात्रा' का भी लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. महेन्द्र ने डॉ. इन्द्रकान्त झा की लेखकीय सक्रियता को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। लेखक-संपादक केदार कानन ने विशेष रूप से मलयालम कविताओं के मैथिली अनुवाद की तारीफ करते हुए कहा कि इससे पाठकों को एक अलग भाषा की संवेदनाओं को समझने का मौका मिलेगा।

वहीं, कवि कुमार विक्रमादित्य ने आशीष चमन के आलोचनात्मक लेखन को मैथिली की परंपरा को आगे बढ़ाने वाला बताया। वरिष्ठ लेखिका सुस्मिता पाठक ने हाइकू-संग्रह के प्रकाशन को एक बड़ी उपलब्धि माना, जबकि युवा कवयित्री दीपिका चन्द्रा ने आशीष चमन की कहानियों में ठेठ शब्दों के सहज प्रयोग की प्रशंसा की।

कार्यक्रम का संचालन फिल्म एक्टिविस्ट और लेखक किसलय कृष्ण ने किया। उन्होंने कहा कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में निरंतर लेखन मैथिली के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। इस अवसर पर गिरिबाला झा, मनोज कुमार और राजा झा सहित कई साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

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