श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
कुछ इसी तरह से इन सदाबहार गीतों की मधुर धुनों पर झूम उठने का मन हो उठता है पुरानी दिल्ली के दरिया गंज में स्थित इस छोटी-सी दुकान के सामने से निकलते हुए!
जी! हाँ! इस छोटी-सी दुकान पर आकर आपको भी मिल जाएगा सन् – 1940 या उससे भी पहले की उन सुरीली और संगीतमय यादों में ले जाने वाले वो हर-दिल अज़ीज़ म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स के खज़ाने की दुनिया में खो जाने का एक सुनहरा अवसर! जिन्हें रुशदा ख़लील और उनके पूरे परिवार के सदस्य बेहद प्यार के साथ संजोते हुए नज़र आते हैं।

क्यों है ख़ास यह दुकान और यहाँ पर मिलने नाले यह म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट्स?
यहाँ पर आकर आपको सदियों पुराने या यूँ कहें कि आज के ज़माने में ऑउट-डेटेड माने जाने वाले ग्रामोफ़ोन को एक नए और मनमोहक अंदाज़ में देखने का मौक़ा मिल जाएगा। सच मानिए! तो, वही रूप, प्ले होने का वही अंदाज़ और तरीक़ा; लेकिन, एकदम आज के ज़माने के हिसाब से न्यू और ट्रैंडी लुक में दिखने वाले इन ग्रामोफ़ोन्स की छटा ही निराली है!
इसके साथ ही ख़ास बात यह है कि इन ग्रामोफ़ोन्स को रुशदा ख़लील अपने परिवार के सदस्यों की मदद से अपने हाथों से तैयार कर एक मनमोहक रूप देतीं हैं!
इन ग्रामोफ़ोन्स के अलावा इस दुकान पर आपको ब्रास (पीतल) की प्रैस के रूप में ऐश ट्रे, नए और ट्रैंडी लुक्स में टैलीफ़ोन्स इत्यादि, जैसे कई अनोखे उत्पाद देखने और ख़रीदने को मिल जाएँगे।
ख़ानदानी विरासत को सहेजती यह अनोखी दुकान!
दरिया गंज के कूचा चेलान से आने वालीं रुशदा ख़लील बतातीं हैं कि उनका यह काम ख़ानदानी है और कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। रुशदा के पिता जी, दादा जी, परदादा जी और ना जाने कितनी ही पीढ़ियों से सब लोग इसी काम में अपनी महारत हासिल किए हुए हैं।

वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मिला प्रोत्साहन!
वो कहते हैं ना कि मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि आपकी क़ामयाबी शोर मचा दे! तो, इसी पंक्ति को साकार करतीं नज़र आ रहीं हैं 26 साल की यह छोटी-सी लड़की – रुशदा ख़लील! और, यहाँ पर रुशदा के हौंसले को बढ़ाने और जीवन में नए आयाम हासिल करने के लिए उनके सपोर्ट में आपको एकदम मुस्तैदी से खड़े मिलेंगे उनके भाई – अब्दुल और बड़ी बहन – बुशरा!
रुशदा ख़लील के अपनी विरासत को संजोने और उसे आगे बढ़ाने के काम के लिए हाल ही भारत मंडपम में डी.सी. हैंडीक्राफ़्ट्स के द्वारा उन्हें अपनी ख़ानदानी विरासत को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करने हेतु एक स्टॉल भी मुहैया करवाया गया था। इस दौरान वस्त्र मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा रुशदा के इस कार्य को ख़ूब सराहा भी गया।
• लेखक के बारे में:
श्रीनाथ दीक्षित दिल्ली के रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार हैं। जर्नलिज़्म एवं मास कम्यूनिकेशन में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त श्रीनाथ दीक्षित को जर्नलिज़्म और मीडिया क्षेत्र की विविध विधाओं जैसे – प्रिंट (अख़बार, मैग्ज़ीन, इत्यादि), रेडियो, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, फ़ोटोग्राफ़ी, डिजिटल मीडिया, पब्लिक रिलेशंस और एडवरटाइज़िंग, इत्यादि, में क़रीब 20 साल का अनुभव है।
साथ ही दुनिया की सबसे छोटी (0.3 एम.एम. से 0.2 एम.एम. के साइज़ की) कागज़ की नाव बनाने के लिए लिम्का बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स में श्रीनाथ दीक्षित का नाम तीन बार – साल – 2006, 2013 और 2015 में दर्ज़ किया जा चुका है।
कॉन्टैक्ट डिटेल्स: sngdixit@gmail.com








