हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 18 फरवरी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सम्मिट यहां के प्रगति मैदान में पूरे हर्षोल्लास से आयोजित किया जा रहा है। आज सम्मेलन का तीसरा दिन है। लेकिन दर्शक तो भ्रमित हैं ही, ए आई स्वयं भी दर्शकों की भीड़-भाड़ को देख कर चकित है। उसे समझ में ही नहीं आ रहा है कि कौन उसका टारगेट आडियेंस है और कौन सिर्फ दर्शक !
सम्मेलन में डाटा बेहिसाब है लेकिन उससे तैयार हो रही तस्वीर धुंधली है। यहां हर उद्यमी ए आई को बेचने में लगा है जबकि खरीदने के लिए कोई तैयार नहीं है। युवाओं को लग रहा है कि बस यही वह बुलेट ट्रेन है जो पल भर में उन्हें मनोवांछित नौकरी की मंजिल तक पहुंचा देगी। कोई सही उत्तर नहीं दे रहा है। हर कोई अपने सॉफ्टवेयर का सौदा करना चाह रहा है। कोई भी ए आई का भविष्य और उसकी संभावित आयु नहीं बता रहा है।
सम्मेलन के आयोजक आज राहत महसूस कर रहे हैं। वीवीआईपी का वजन कुछ कम हुआ है। दो दिन और बचे हैं। उनकी भी औपचारिकताएं पूरी करने की कोशिश जारी है। ए आई कौशल रथ पर सवारी करने के लिए विद्यार्थी अधिक उत्सुक हैं।
अनेक लोग इस गंभीर सम्मेलन में भी ए आई में कम, दोस्तों में अधिक रुचि दिखाते नजर आए। एडोब एक्सप्रेस के मंडप पर भीड़ अधिक दिखाई दी! कुछेक दोस्त ए आई बनते भी नजर आये !
सम्मेलन में भाग ले रहे हैदराबाद के ए आई उद्यमी शशिकांत रेड्डी और उपेंद्र वेलोर ने बताया कि यह सम्मेलन उनकी कल्पना से भी कहीं बेहतर है। दोनों ने भारत में भी ए आई के विस्तार को लेकर खुशी जाहिर की लेकिन साथ ही इसके दुष्प्रभाव और दुरूपयोग को लेकर चिंता भी जाहिर की।
सम्मेलन में सुरक्षा व्यवस्था कभी सख्त, कभी लचर दिखी। उचित बारकोड से प्रवेश देते समय परिचय पत्र की जांच से कभी – कभी छूट दी गई। यह क्षणिक छूट महंगी पड़ सकती है। दिल्ली में आज बूंदाबांदी के बीच भी सम्मेलन में लोगों की भीड़ अपेक्षा से अधिक रही। इस पांच दिवसीय सम्मेलन में शेष दो दिन भी दिलचस्प रहने की संभावना है।







