ये कैसा SCAM: पहले 6000 करोड़ फिर 6500 हजार करोड़ आंकड़ा 15000 करोड़ के पार

- दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने रिलायंस हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी अमित बापना की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पेश किए गए तर्कों को देखते हुए यह फैसला सुनाया।
इस पूरे मामले में अमित बापना को अमिताभ झुनझुनवाला और 53 अन्य लोगों व फर्मों के साथ चार्जशीट किया गया है। गौरतलब है कि इन सभी को अप्रैल 2026 में ED द्वारा गिरफ्तार किया गया था, हालांकि अमिताभ झुनझुनवाला को दिल्ली हाईकोर्ट से मेडिकल आधार पर जमानत मिल चुकी है। स्पेशल सीबीआई जज विशाल पहलूजा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपी को जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिलते हैं।
ED ने लगाया 15,548 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
अमित बापना के वकील ने अदालत में दलील दी कि वह केवल एक कर्मचारी के तौर पर काम कर रहे थे और मुख्य आरोपी अमिताभ झुनझुनवाला के निर्देशों का पालन कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि बापना को इस अपराध से कोई आर्थिक लाभ नहीं हुआ और न ही उन्होंने पैसों की हेराफेरी (layering) में कोई भूमिका निभाई।
दूसरी ओर, ED के सीनियर एडवोकेट जोहेब हुसैन ने इन दावों का कड़ा विरोध किया। ED ने अदालत को बताया कि अमित बापना रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (R-CAP) के CFO थे और RHFL में भी डायरेक्टर और CFO की भूमिका में थे। ED के मुताबिक, बापना ने अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करते हुए कई गंभीर अनियमितताएं कीं:
- उन्होंने 72 क्रेडिट अप्रेजल मेमो (CAMs) पर हस्ताक्षर किए, जिसके जरिए शेल कंपनियों को 6,000 करोड़ रुपये का लोन दिया गया, जो बाद में NPA हो गया।
- RCFL में कोई आधिकारिक पद न होने के बावजूद, उन्होंने अनधिकृत तरीके से 60 कॉर्पोरेट लोन मंजूर किए, जिनकी राशि 6,500 करोड़ रुपये से अधिक थी। ये लोन भी बाद में डूब गए।
- इस पूरे घोटाले में करीब 15,548 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई (proceeds of crime) शामिल है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।
ED ने जोर देकर कहा कि इतने बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन की लूट और आर्थिक अपराध में शामिल व्यक्ति को जमानत देना उचित नहीं होगा। इसी आधार पर कोर्ट ने अमित बापना की याचिका को खारिज कर दिया।