जंतर मंतर विरोध प्रदर्शन मामला: दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले की जांच क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल को सौंप दी है। इस कार्रवाई से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो प्रमुख नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रंका की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। पुलिस ने मामले में दर्ज प्राथमिकी और प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर हुई गतिविधियों की विस्तृत जांच के लिए यह कदम उठाया है।
13 अक्टूबर की घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और संसद मार्ग पुलिस थानों में दो अलग-अलग FIR दर्ज की थीं। इनमें सरकारी कामकाज में बाधा डालने, निजी परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत प्रवेश करने और पुलिसकर्मियों को ड्यूटी निभाने से रोकने समेत कई आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले में कुल आठ कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
निजी परिसर के रास्ते जंतर मंतर पहुंचने का आरोप
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, सौरव दास, आशुतोष रंका, अजिंक्य शिंदे और CJP के 11 अन्य सदस्य कथित तौर पर एक निजी परिसर के रास्ते जंतर मंतर पहुंचे थे। पुलिस ने इस प्रवेश को अनधिकृत बताया है। प्रदर्शन स्थल पर लागू प्रतिबंधों के बावजूद वहां विरोध प्रदर्शन किए जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत बढ़ी
इस मामले में स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) की अदालत ने सौरव दास और आशुतोष रंका की न्यायिक हिरासत 21 अक्टूबर तक बढ़ा दी थी। अदालत के आदेश के अनुसार, आरोपियों पर कानून का पालन नहीं करने और 11 अक्टूबर को जमा किए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप हैं।
अदालत ने जांच अधिकारी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिबंधों के बावजूद CJP के सदस्यों ने लोगों को वहां विरोध प्रदर्शन के लिए कथित तौर पर उकसाया। मामले में आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
अजिंक्य शिंदे को राहत, दो नेताओं की जमानत याचिकाएं खारिज
अदालत ने अजिंक्य शिंदे को पर्सनल बॉन्ड पर रिहा कर दिया, जबकि सौरव दास और आशुतोष रंका की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने आशंका जताई कि रिहा होने के बाद दोनों आरोपी दोबारा इस तरह के प्रदर्शन आयोजित कर सकते हैं।
इस बीच, CJP प्रमुख अभिजीत डिपके ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है। उन्होंने इसे युवा प्रदर्शनकारियों को डराने की कोशिश बताया। डिपके का दावा है कि पार्टी के नेता अपनी मांगों पर कायम हैं और सरकारी तंत्र के दबाव के आगे नहीं झुकेंगे।
क्राइम ब्रांच की इंटर-स्टेट सेल अब मामले की जांच करेगी। जांच में दर्ज FIR, कथित अनधिकृत प्रवेश, प्रदर्शन से संबंधित गतिविधियों और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।