Indian Television News: 5 दशकों का सफर हुआ पूरा 'द इवोल्यूशन ऑफ टीवी न्यूज इन इंडिया: फ्रॉम दूरदर्शन टू डिजिटल डिस्रप्शन – एन इनसाइडर्स अकाउंट' किताब का हुआ विमोचन

Sonu Nigam20 October 20262 min read0 viewsदिल्ली एनसीआर
 Indian Television News: 5 दशकों का सफर हुआ पूरा  'द इवोल्यूशन ऑफ टीवी न्यूज इन इंडिया: फ्रॉम दूरदर्शन टू डिजिटल डिस्रप्शन – एन इनसाइडर्स अकाउंट' किताब का हुआ विमोचन

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में शनिवार को भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के एक स्वर्णिम अध्याय को शब्दों में पिरोकर पेश किया गया। प्रसार भारती के पूर्व अध्यक्ष सूर्य प्रकाश ने दिग्गज प्रसारक और दूरदर्शन की पूर्व प्रोड्यूसर हरसरन बीर कौर पांडे की नई किताब 'द इवोल्यूशन ऑफ टीवी न्यूज इन इंडिया: फ्रॉम दूरदर्शन टू डिजिटल डिस्रप्शन – एन इनसाइडर्स अकाउंट' का विमोचन किया। ओम बुक्स इंटरनेशनल द्वारा प्रकाशित यह किताब केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि भारतीय टीवी समाचारों के पिछले पांच दशकों के बदलावों का एक जीवंत दस्तावेज है।

इस खास मौके पर मीडिया जगत की कई दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें तीन बार के ग्रीन ऑस्कर विजेता माइक पांडे, दूरदर्शन के मशहूर एंकर शम्मी नरंग, नीथी रविंद्रन, कोमल जी.बी. सिंह और ओम बुक्स के प्रकाशक अजय मागो शामिल थे। किताब में इस बात का विस्तृत विवरण है कि कैसे भारतीय टेलीविजन एक सरकारी चैनल (दूरदर्शन) से शुरू होकर सैटेलाइट चैनलों और आज के डिजिटल युग तक पहुंचा।

दूरदर्शन के शुरुआती संघर्ष और यादगार किस्से

लेखिका हरसरन बीर कौर पांडे ने 1970 के दशक की शुरुआत में दूरदर्शन के मंडी हाउस मुख्यालय से अपने करियर की शुरुआत की थी। वह उन 90 पेशेवरों में शामिल थीं जिन्हें दिल्ली के बाहर टेलीविजन सेवाओं के विस्तार के लिए चुना गया था। बीबीसी से प्रशिक्षण लेने के बाद, उन्होंने उस दौर में काम किया जब संसाधन बेहद सीमित थे और रिपोर्टिंग पूरी तरह से फिल्म-आधारित हुआ करती थी।

किताब में कुछ बेहद दिलचस्प किस्से साझा किए गए हैं। जैसे 1980 में जब जॉन लेनन की हत्या हुई, तब विजुअल्स की कमी को पूरा करने के लिए पांडे ने अपने निजी विनाइल रिकॉर्ड कवर का इस्तेमाल किया ताकि समाचार बुलेटिन में विजुअल सामग्री दिखाई जा सके। यह उस दौर की रचनात्मकता और चुनौतियों को दर्शाता है जब आज की तरह इंटरनेट या इंस्टेंट डेटा उपलब्ध नहीं था।

अपने 14 साल के दूरदर्शन करियर के दौरान, उन्होंने भारतीय इतिहास की कई बड़ी घटनाओं को कवर किया, जिनमें शामिल हैं:

  • 1975-77 का आपातकाल और जेपी आंदोलन।
  • 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या।
  • विभिन्न आम चुनाव और चुनाव प्रसारण की शुरुआती तकनीक।
  • फिदेल कास्त्रो, यासर अराफात और निकोले चाउसेस्कु जैसे अंतरराष्ट्रीय नेताओं की कवरेज।

लेखिका ने किताब में प्रणय रॉय, अशोक लाहिरी और विनोद दुआ जैसे दिग्गजों के साथ काम करने और शुरुआती स्टूडियो ग्राफिक्स के विकास का भी जिक्र किया है। प्रसारण के अलावा, उन्होंने यूनिसेफ (UNICEF) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में अंतरराष्ट्रीय सिविल सेवक के रूप में 21 साल बिताए, जिसका अनुभव भी इस किताब के नैरेटिव को मजबूती देता है। यह किताब उन सभी लोगों के लिए एक गाइड की तरह है जो यह समझना चाहते हैं कि भारत में समाचारों को पेश करने का तरीका समय के साथ कैसे बदला।

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