Delhi Pollution: देश के लोग इस समय जहरीली हवा की वजह से परेशान हैं। AQI की चिंताजनक स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट से लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट तक में सुनवाई चल रही है। 27 नवंबर को तो कोर्ट ने यहां तक कह दिया था कि अधिकारी महानगर में वायु प्रदूषण के लिए इथोपिया में ज्वालामुखी फटने से उठी राख को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते। AQI उससे बहुत पहले से ही खराब है।
निर्माण स्थलों पर काम रोके
कोर्ट ने कहा कि इस विस्फोट से पहले भी, अगर कोई बाहर निकलता था तो 500 मीटर से आगे दृश्यता बहुत कम होती थी। पीठ ने दिल्ली की स्थिति का जिक्र करते हुए पूछा कि इस समस्या से निपटने के लिए क्या प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं। पीठ ने सवाल किया कि सबसे प्रभावी उपाय क्या हो सकते हैं? हम सब देख रहे हैं कि दिल्ली में क्या हो रहा है? इसका क्या असर होगा?
BMC ने दिए निर्देश
अदालत ने मामले की सुनवाई शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी। वहीं, शुक्रवार को बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने कहा है कि उसने मुंबई में बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) को ध्यान में रखते हुए 53 निर्माण स्थलों पर काम रोकने के नोटिस जारी किए हैं। बीएमसी ने गुरुवार को ये भी निर्देश दिया कि पहले से जारी किए गए वायु प्रदूषण संबंधी दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए। इन निर्देशों में लगातार काम करने वाले एक्यूआई निगरानी सेंसर लगाना शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
वहीं, दिल्ली-एनसीआर में बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीर चिंता जताई है। 27 नवंबर को ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है कि इसे घुमाकर समस्या खत्म कर दें। कोर्ट ने कहा कि हमें पता है कि दिल्ली-एनसीआर के लिए खतरनाक समय है। इस मामले का तुरंत हल निकालने की कोशिश की जाना चाहिए। पर अब 1 दिसंबर को सुनवाई होगी।
लगातार हो सुनवाई- कोर्ट
अदालत ने साफ कहा कि हवा की गुणवत्ता की समस्या गंभीर है और इसे तुरंत हल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की जरूरत है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि प्रदूषण के मामले पर नियमित सुनवाई होनी चाहिए। उन्होंने नोट किया कि अक्सर दीपावली के समय प्रदूषण से संबंधित मामलों पर सुनवाई होती है, लेकिन उसके बाद यह मामले की लिस्ट से गायब हो जाता है। ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और नियमित सुनवाई जरूरी है ताकि ठोस और प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।







