लुवास के दो वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय सम्मेलन में लहराया परचम , विशेष शोध प्रस्तुति के लिए मिला प्रथम पुरस्कार

Sonu Nigam17 October 20262 min read0 viewsशिक्षा
लुवास के दो वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय सम्मेलन में लहराया परचम , विशेष शोध प्रस्तुति के लिए मिला प्रथम पुरस्कार

हिसार के लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास) के लिए गर्व का क्षण आया है। विश्वविद्यालय के दो प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों ने एक राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में अपने शोध कार्यों के दम पर सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुति का प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया है। यह उपलब्धि बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के बिहार पशु चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित 13वें वार्षिक अधिवेशन एवं राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हासिल हुई।

इस प्रतिष्ठित सम्मान को पशु जैव प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अमन और पशुचिकित्सा एवं पशुपालन प्रसार शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रिचा ने जीता है। खास बात यह है कि डॉ. अमन को उनकी उपलब्धियों के लिए एसोसिएट फेलो, एसवीएसबीटी सम्मान से भी नवाजा गया है।

इन आधुनिक शोध कार्यों ने दिलाई पहचान

इस सम्मेलन का मुख्य केंद्र जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और जैव प्रौद्योगिकी के जरिए पशु स्वास्थ्य और पशुधन उत्पादन में सुधार लाना था। देशभर से आए विशेषज्ञों के बीच डॉ. अमन ने गोवंशीय वीर्य में एक्स और वाई गुणसूत्र वाले शुक्राणुओं के अनुपात के आकलन के लिए एक नई 'टैकमैन प्रोब आधारित रियल-टाइम पीसीआर जांच' विकसित की है। उनका यह शोध पशु प्रजनन जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. विनोद कुमार वर्मा ने दोनों वैज्ञानिकों की इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी उपलब्धि मिलना विश्वविद्यालय के लिए सम्मान की बात है और यह शोध पशु चिकित्सा विज्ञान तथा पशुधन विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। इसके अलावा, अधिष्ठाता डॉ. अनीश यादव और निदेशक डॉ. संजय यादव ने भी वैज्ञानिकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

वहीं, डॉ. रिचा ने गोवंशीय एच-वाई प्रतिजन के प्रतिरक्षात्मक लक्ष्यीकरण और केडीएम5डी के विरुद्ध प्रतिपिंडों के निर्माण पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने एंजाइम-संबद्ध प्रतिरक्षी परीक्षण (एलाइसा) के माध्यम से इसका विश्लेषण किया, जिसके लिए उन्हें प्रथम पुरस्कार मिला। उनका यह अध्ययन पशु प्रजनन और प्रतिरक्षा विज्ञान में नई संभावनाओं के द्वार खोलता है।

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