भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम दौर में, लेकिन एस जयशंकर बोले- 'जब तक पूरा न हो, खत्म नहीं'
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अपडेट दिया। जानें क्यों उन्होंने कहा कि जब तक काम पूरा न हो, उसे खत्म नहीं माना जाता।

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते (India-US trade deal) की बातचीत अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि समझौता पूरा होने के बहुत करीब है, लेकिन कूटनीति और व्यापारिक समझौतों में आखिरी कदम सबसे चुनौतीपूर्ण होते हैं।
एस जयशंकर ने एक दिलचस्प टिप्पणी करते हुए कहा, "देखिए, जब तक काम पूरी तरह से खत्म न हो जाए, तब तक उसे पूरा नहीं माना जाता।" उन्होंने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल दोनों ने संकेत दिए हैं कि समझौता अंतिम चरणों में है। हालांकि, जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि अंतिम मील (last mile) की चुनौतियों को सुलझाने के लिए negotiating टीमें अभी भी काम कर रही हैं। जब उनसे इन चुनौतियों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने विनम्रता से इनकार करते हुए कहा कि यह विवरण बातचीत करने वाली टीमों के लिए छोड़ देना चाहिए।
ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक अस्थिरता पर जोर
व्यापार समझौते के अलावा, विदेश मंत्री ने दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और जोखिमों के बीच 'विविधीकरण' (Diversification) की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब कोई भी देश व्यापार, ऊर्जा और भू-राजनीति में स्थिरता को हल्के में नहीं ले सकता। उन्होंने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का उदाहरण देते हुए समझाया कि जिस तरह शेयर बाजार में जोखिम कम करने के लिए निवेश अलग-अलग जगहों पर किया जाता है, वैसे ही देशों को भी किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय अपने विकल्पों को बढ़ाना चाहिए।
हाल ही में विदेश मंत्री जयशंकर ने मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी की थी। इस मुलाकात में व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। मार्को रुबियो ने भारत को पेट्रोलियम रिफाइनिंग का 'सुपरपावर' बताया और वे जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा भी कर चुके हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं और कहा है कि यह "काफी करीब" है। दोनों देश पिछले एक साल से अधिक समय से टैरिफ, कृषि उत्पादों और औद्योगिक सामानों से जुड़े मतभेदों को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दोनों देशों के नेताओं के बीच इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।