श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
होता है ना कुछ ऐसा ही कि जब हम किसी भी चीज़ को चाहते हैं और वो हमें नहीं मिल पाती! तो, ऐसे में हमारे साथ दो बातें होती हैं – या तो हम डिप्रैस्ड हो जाते हैं और उस चीज़ को पाने की इच्छा ही छोड़ देते हैं या फिर अपनी इस हार से सबक लेकर अपने एम को पाने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं! यूँ तो, एक पुरानी कहावत भी है:
“करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान,
रसरी आवत जात है, सिल पर पड़त निशान!”
जी हाँ! इस कहावत से भी यही संदेश मिलता है कि हमें अपने लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए! क्योंकि, सक्सेस पाने की कोशिश करना तो, आपका कर्तव्य है और इस कोशिश को सफ़लता में बदलना ईश्वर के हाथों में है!
इसी कहावत को ना सिर्फ़ जीया है; बल्कि, पूरा करके सच साबित भी किया है दिल्ली की रहने वाली इरा सिंघल ने साल – 2015 के आई.ए.एस. ऑफ़िसर के एग्ज़ाम में टॉपर का ख़िताब अपने नाम करके!

तो, आइए डालते हैं इरा के एक आम लड़की से आई.ए.एस. टॉपर – 2015 बनने तक के सफ़र पर एक नज़र, उन्हीं की ज़ुबानी!
पेश हैं इरा सिंघल से श्रीनाथ दीक्षित की ख़ास मुलाक़ात के कुछ अंश:
- आपने यह आई.ए.एस. ऑफ़िसर के एग्ज़ाम को कितने अटैंप्ट्स में क्लीयर किया?
यूँ तो, मैं इस पोस्ट के लिए पिछले तीन एग्ज़ाम्स में क्वॉलिफ़ाई कर चुकी थी! और, सिर्फ़ इसी पोस्ट के लिए नहीं; बल्कि, मैंने आई.आर.एस. जैसी और भी पोस्ट्स के एग्ज़ाम्स एक ही अटैंप्ट में क्वॉलिफ़ाई किए हुए थे। लेकिन, लास्ट राउंड में आकर मेरी दिव्यांगता की मजबूरी को देखते हुए मुझे फ़िज़ीकल फ़िटनेस राउंड्स में डिसक्वॉलिफ़ाई कर दिया जाता रहा।
- तो, साल – 2015 में मिली सफ़लता के बारे में थोड़ी रोशनी डालें……
बिल्कुल! मैंने मशहूर चॉकलेट ब्राण्ड, कैडबरी डेरी मिल्क में एक ब्राण्ड एग्ज़ीक्यूटिव के तौर पर अपने कैरियर की शुरुआत की थी। लेकिन, मेरे कज़न भाई की प्रेरणा से मैंने अपनी जॉब छोड़कर आई.ए.एस. की तैयारी शुरू कर दी।
वैसे तो, मैं इस पोस्ट के लिए पिछले तीन एग्ज़ाम्स में क्वॉलिफ़ाई कर चुकी थी! लेकिन, हर बार फ़िज़ीकल फ़िटनेस राउंड्स में डिसक्वॉलिफ़ाई होने के बाद मुझे कई बार डिप्रैशन भी हुआ और मैंने इस सपने को छोड़ने का भी मन बनाकर दोबारा कैडबरी डेरी मिल्क में अपनी जॉब ज्वॉइन करने की कोशिश की। लेकिन, मेरे कज़न भाई की निरंतर प्रेरणा से मैंने अपने इस सपने को पूरा करने के लिए तैयारी जारी रखी और उसी मेहनत और लगन से एग्ज़ाम्स में अपियर होती रही।
- सुनने में आया है कि आपके कारण अब इस हैन्डीकैप्ड कैटिगरी के और भी स्टूडेंट्स को काफ़ी फ़ायदा होगा……
जी! यह बात एकदम सही है! अपने निरंतर प्रयास और एकाग्रता से मैंने कोर्ट में फ़ाइल की अपनी पिटीशन में सफ़लता पाई! मेरे दृढ़ संकल्प को देखते हुए और इस कैटिगरी में आने वाले स्टूडेंट्स को भी अपनी क्षमता को साबित कर एक सफ़ल एड्मिनिस्ट्रेटर बनने का मौक़ा देने के लिए मुझे देश की इस सबसे प्रतिष्ठित पोस्ट के लिए सिलेक्ट कर आख़िरकार एक हिस्ट्री बना ली है।

- आगे आने वाली पीढ़ी के लिए इस फ़ैसले ने किस हद तक सफ़लता के द्वार खोले हैं?
माननीय कोर्ट के इस एतिहासिक फ़ैसले को मैं दिल से सलाम करती हूँ! क्योंकि, इससे ना केवल इस कैटिगरी के स्टूडेंट्स को जॉब ही रही है; बल्कि, अपने खोए हुए आत्मविश्वास को दोबारा पाकर जीवन में आगे बढ़कर देश की सेवा करने का मौक़ा भी मिल रहा है।
- तो, इस एग्ज़ाम की प्रिप्रेशन्स के लिए आप क्या शिड्यूल फ़ॉलो करतीं थीं?
इस एग्ज़ाम की प्रिप्रेशन्स के लिए मैंने कभी भी अपने दिमाग पर एक प्रैशर नहीं बनाया; बल्कि, बहुत ही आराम से खेलते-कूदते और ख़ूब सारी मस्ती करते हुए मैंने अपने पूरे सिलेबस को अच्छे-से सोच-समझकर याद किया।
- आई.ए.एस. की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को प्रिप्रेशन्स के लिए आप क्या टिप्स देना चाहेंगी?
मैं सभी आई.ए.एस. एस्पिरेंट्स को यही टिप्स देना चाहूँगी कि सबसे पहले तो, आप अपना एक प्रॉपर टाइम-टेबल बनाएँ! और, किसी भी सब्जेक्ट्स को रटकर याद करने की ना सोचें; बल्कि, उसे ठीक तरह से समझकर तैयार करें।
- आई.ए.एस. की प्रिप्रेशन्स के दौरान आप अपना मूड रिफ़्रैश करने के लिए क्या करतीं थीं?
सच बताऊँ; पढ़ाई के मामले में तो, मैं बिल्कुल महा आलसी थी! अगर इस सवाल को आप यूँ पूछें कि मैं पढ़ने के लिए मन कैसे बनाती थी; तो, शायद यह सवाल एकदम करेक्ट रहेगा! हा……हा……हा……हा……हा……
वैसे, जहाँ तक बात है मूड रिफ़्रैश करने की; तो, मैं कोई भी गेम या स्पोर्ट्स खेलकर दोबारा पढ़ाई करने के लिए अपना मूड रिफ़्रैश कर लेती थी।
- एक आई.ए.एस. ऑफ़िसर के अलावा इरा सिंघल कौन हैं?
इरा सिंघल एक बहुत ही नटखट और फ़न-लविंग लड़की हैं, जो अपने जीवन में हरदम कुछ नया एक्सपैरिमेंट करके देखना चाहती हैं! लेकिन, हाँ! अब आई.ए.एस. ऑफ़िसर बनने के बाद मेरे कँधों पर देश की ज़िम्मेदारी आ गई है और मैं उसे पूरी तन्मयता और प्रतिबद्धता के साथ निभा रही हूँ!
- चलते-चलते हमारे पाठकों के लिए कोई संदेश देना चाहेंगी?
हमें अपने जीवन में आईं किसी भी तरह की परेशानियों से कभी भी हारना नहीं है। क्योंकि, हर परेशानी को पार करके पाई जा सकने वाली जीत आपका हमेशा इंतेज़ार करती है! तो, दृढ़ता के साथ अपने लक्ष्य प्राप्ति की ओर बढ़ें!







