लेखक : हरेन्द्र प्रताप सिंह
महानदी के पास छत्तीसगढ़ के प्राचीन दक्षिण कोशल की राजधानी के रूप में विख्यात श्रीपुर का ही आधुनिक रूप है अपेक्षाकृत एक नया जिला आज का महासमुंद। बेहद शांत, मस्त और खुशहाल क्षेत्र है पुराने मंदिरों का शहर महासमुंद। पर्यटन विकास और रोजगार के दायरे में विस्तार आज यहां की बुनियादी आवश्यकता है। यहां पर पिछले 31 मार्च को राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका आयोजन संगठन की छत्तीसगढ़ प्रदेश इकाई ने स्थानीय सनातनियों के सक्रिय सहयोग से किया। इसमें राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन के देश भर से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने पूरे उत्साह से भाग लिया। उनसे अधिक उत्साही छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी नजर आए। महासमुंद का उत्साह तो उन उत्साही लहरों जैसा था जो आसमान को जमीन पर उतरता देख रोमांचित महसूस कर रहा था। छत्तीसगढ़ के बच्चों और किशोरों के स्वागत नृत्य – संगीत में इसकी झलक दिखाई दे गयी। सबका साथ सबका विकास की भावना के बीच महासमुंद में हिन्दुत्व की लहर उठती हुई दिखी।
राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन के बैनर तले दरअसल यह सनातन समागम था जिसमें देश के प्रमुख संत और बुद्धिजीवी भी अच्छी संख्या में बाहर से महासमुंद में एकजुट हुए।
संत समाज से जगतगुरु शंकराचार्य रह चुके स्वामी त्रिलोकी स्वरूपतीर्थ, महामंडलेश्वर स्वामी श्री विष्णु गिरि जी बापू और जगतगुरु श्री कल्कि महाराज जी तथा उनके अनेक शिष्यों ने इस महासम्मेलन में भाग लिया। बुद्धिजीवियों की कतार में एक से बढ़कर एक चिंतक राष्ट्रवादी इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न प्रदेशों से बड़ी संख्या में पहुंचने में सफल रहे। इनमें प्रमुख हैं राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र द्विवेदी, महामंत्री मयंक ढेंगुला, महामंत्री डॉ. विभा द्विवेदी, महिला मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यवाहक अध्यक्ष मंजु तिवारी, राष्ट्रीय प्रचार प्रभारी मंगेश भागवत, संत प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महामंत्री मनीष तिवारी, राष्ट्रीय प्रभारी कृष्ण किशोर रेड्डी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विभा रानी एवं राकेश तिवारी, युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री सुमित अग्रवाल, पूर्वांचल प्रभारी जयप्रकाश दुबे तथा अनेक पूर्व सांसद और विधायक। मेजबान प्रदेश छत्तीसगढ़ से भी अनेक बुद्धिजीवी और उद्यमी इस सम्मेलन को सफल बनाने में दिन – रात एकजुट रहे। इनमें प्रमुख हैं छत्तीसगढ़ प्रदेश इकाई के प्रभारी सरजू तिवारी, अध्यक्ष राकेश द्विवेदी, उपाध्यक्ष देवकरण मरकाम,प्रदेश मानवाधिकार प्रकोष्ठ अध्यक्ष कृष्ण कुमार चंद्राकर, महामंत्री जगेश राय, संगठन मंत्री देवीचंद राठी, कोषाध्यक्ष विजय कुमार जायसवाल,प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष मोनिका शर्मा, उपाध्यक्ष वर्षा दुबे, महासमुंद जिला अध्यक्ष राजीव चंद्राकर एवं अन्य जिला पदाधिकारी।
इस सम्मेलन से संतों और राष्ट्रवादियों ने एक स्वर में भारत को सनातन राष्ट्र और गौ माता के संवैधानिक संरक्षण की घोषणा करने की आवश्यकता पर जोर दिया और केंद्र सरकार तथा विभिन्न प्रदेशों की सरकार से इस विषय में पहल करने का अनुरोध किया। सम्मेलन में पूर्व शंकराचार्य ने सनातनियों के विभिन्न लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एकजुट होकर दूरगामी योजनाओं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने सनातनियों को दैनिक दिनचर्या में अपनी संस्कृति के अनुरूप आचरण की सलाह दी और नेपाल की अंदरूनी स्थिति पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर महामंडलेश्वर ने सोये हुए सनातनियों को जागने का संदेश दिया। कल्कि महाराज ने भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण उपाय सुझाए।
राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म को फिर से सुदृढ़ करने के लिए गठित यह संगठन कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एकजुट करने के लिए अस्तित्व में आया है। उन्होंने कहा कि हम दैनिक रूप से राष्ट्र सेवा, गौ सेवा और सनातन सेवा के लिए समर्पित हैं। उन्होंने बताया कि यह संगठन विश्व भर के सनातनियों की अपेक्षा पर खरा उतरने की कोशिश कर रहा है। महिला मोर्चा की राष्ट्रीय प्रभारी डॉ. विभा द्विवेदी ने अधिक से अधिक संख्या में महिलाओं और विशेषकर युवाओं से संगठन में जुड़ने का आह्वान किया। राष्ट्रीय महामंत्री मयंक ढेंगुला ने गरीबों और गौशाला तथा पुराने मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए संगठन द्वारा किये जा रहे महत्वपूर्ण प्रयासों की जानकारी दी।
इस अवसर पर संगठन के प्रवक्ता ने बताया कि देश में निकट भविष्य में अगले दो सम्मेलनों के आयोजन की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। आगामी सम्मेलन शिवपुरी और लखनऊ में आयोजित किये जा रहे हैं।
सम्मेलन में उस समय मार्मिक दृश्य देखने का अवसर मिला जब पूर्व शंकराचार्य ने अपने गले में पड़े दर्जन भर मालाओं को निकाल कर बच्चों के गले में एक – एक कर पहनाना आरंभ कर दिया। फूलों की माला महाज्ञानी शंकराचार्य के हाथों पहन कर बच्चे खूब खुश हो रहे थे। वे खुद को भाग्यशाली समझ रहे थे।
सम्मेलन में शामिल अनेक लोगों को समझ में नहीं आ रहा था कि राष्ट्रीय हिन्दू वाहिनी संगठन के राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए महासमुंद को क्यों चुना गया है। दरअसल सिरपुर का यह क्षेत्र सीखने – सिखाने के लिए जाना जाता है। जाहिर है कि सनातनी वर्तमान हालात के मद्देनजर वहां बहुत कुछ सीखने के लिए पहुंचे थे ताकि भविष्य में वे देश भर के सनातनियों को बहुत कुछ सिखा सकें।









