श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
आज एक-दूसरे से ज़्यादा नाम और शौहरत पाने की होड़ में हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि अब हम एक स्ट्रैस से भरी लाइफ़ जीने पर ख़ुद ही मजबूर हो गए हैं। ऐसे में जब हम अपने काम में व्यस्त होते हैं और कोई ज़रा-सा भी हमें डिस्टर्ब कर देता है; तो, हम एकदम चिढ़चिढ़ा जाते हैं और हमारा मूड ख़राब हो जाता है। इसे कहते हैं मूड फ़्लक्चुएशन यानि, मूड में तेज़ी से उतार-चढ़ाव आना!
आज मूड फ़्लक्चुएशन के मामले काफ़ी मात्रा में सामने आ रहे हैं। तो, क्या हो सकते हैं इन मूड फ़्लक्चुएशंस के संभावित कारण और इनसे बचने के उपाय, बता रही हैं, आइए जानते हैं इस लेख के द्वारा:
अपनी सोच को हावी ना होने दें!
आज आपके दिमाग में इतने सारे काम एक साथ घूमते रहते हैं कि आप अपने आपको हर समय व्यस्त महसूस करते हैं। ऐसे में आपके दिमाग में लाखों ख़याल एक साथ आते हैं, जिनके कारण आपका मूड ख़राब हो जाता है। और-तो-और, आपके यही विचार और ख़याल आप पर हावी होने लगते हैं। जिनके कारण आप निगेटिव सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में आपको चाहिए कि आप अपनी सोच को हावी ना होने दें!

अपने इमोशंस को रखें कंट्रोल में!
हम इंसान कुछ ज़्यादा ही इमोशनल होते हैं। हम किसी भी चीज़ को लेकर एकदम इमोशनल हो जाते हैं। ऐसे में हम जिस चीज़ को चाहते हैं, अगर वो हमें नहीं मिल पाती या हमें उसे खोने का ज़रा-सा भी डर होता है; तो, हमें टेंशन होने लगती है और हमारा मूड फ़्लक्चुएट होने लगता है। तो, हमें चाहिए कि हम अपने इमोशंस को कंट्रोल में रखें!
आत्म–सम्मान और आत्मविश्वास की कमी भी हो सकती है एक बड़ा कारण!
डॉक्टर्स का मानना है कि जिन लोगों को अपना आत्म-सम्मान खोने का डर होता है, उनमें आत्मविश्वास की कमी साफ़ देखी जा सकती है। यही कारण है कि वो अपना कोई भी काम करते समय घबराए-से रहते हैं, जिसकी वजह से उनका मूड भी ख़राब रहता है। तो, जितना हो सके; अपना आत्मविश्वास बढ़ाएँ और टेंशन मुक्त रहें!
हॉर्मोन्स भी हो सकते हैं एक कारण!
माना जाता है कि जो महिलाएँ 40 साल की उम्र के पढ़ाव में होती हैं, उनमें भी मूड फ़्लक्चुएशंस यानि, मूड में उतार-चढ़ाव बहुत तेज़ी से देखे जाते हैं। ऐसे में इन महिलाओं के घर के लोगों और दोस्तों को इस समस्या को समझना चाहिए और उन्हें सहारा देना चाहिए!
प्री–मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के समय भी लड़कियों के व्यवहार में होते हैं मूड फ़्लक्चुएशंस!
डॉक्टर्स का मानना है कि जब लड़कियों को मेंस्ट्रुअल साइकल के दौरान या उससे पहले प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम महसूस होता है, तब अक्सर देखा जाता है कि लड़कियाँ चिढ़चिढ़ी-सी हो जाती हैं और उन्हें गुस्सा जल्दी आता है और वो ज़्यादातर उदास रहती हैं। इस दौरान पहले जो चीज़ें उन्हें पसंद आती थीं, उनमें भी वो अपना इंटेरस्ट खो देती हैं। आम तौर पर इस कारण को घर के लोग नज़र-अंदाज़ कर देते हैं। ऐसे में ज़रूरत है कि हम इस कारण को नज़र-अंदाज़ न करें और उन्हें सपोर्ट करें!

पौष्टिक खाने के अभाव से भी होता है मूड फ़्लक्चुएशन!
आज की पीढ़ी ज़्यादातर जंक फ़ूड्स पर ही जीती है! जिसके कारण उन्हें स्वस्थ रहने के लिए ज़रूरी पोषण तत्व नहीं मिल पाते और वो अक्सर बीमार रहते हैं। ऐसे में अगर जब आप बीमार होते हैं; तो, आपको कुछ भी अच्छा नहीं लगता और आपका मूड भी ख़राब रहता है। तो, मूड अच्छा रखने के लिए सबसे ज़रूरी यह है कि आप पौष्टिक खाना खाएं और स्वस्थ रहें!
क्या कहते हैं साइकायट्रिस्ट?
डॉ. उदय के. सिन्हा,
अतिरिक्त प्रॉफ़ेसर एवं हैड,
क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग,
मानव व्यवहार और संबद्ध विज्ञान संस्थान (इ.ह.बा.स.),
दिल्ली सरकार।
आज हमारे दिमाग में इतने सारे काम एक साथ घूमते हैं कि हम हर समय ही अपने आपको व्यस्त-सा महसूस करते हैं। ऐसे में हम चाहकर भी आराम से नहीं रह सकते! इस दौरान अगर कोई हमें ज़रा-सा भी डिस्टर्ब करता है; तो, हम एकदम चिढ़चिढ़ा जाते हैं और गुस्सा हो जाते हैं। इसके कारण पूरा दिन हमारा मूड ख़राब रहता है। देखा जाए; तो, हमारे पास मूड ख़राब होने या मूड फ़्लक्चुएशंस के कुल 75 से 80 प्रतिशत मामले आते हैं, जहां मूड फ़्लक्चुएट होने की वजह से लोग काफ़ी परेशान से रहते हैं।
और, वैसे भी यह कहना बहुत ही मुश्किल है कि मूड फ़्लक्चुएशंस कितनी देर तक रहते हैं; क्योंकि, यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वो किसी भी बात को किस तरह से लेते हैं। मूड फ़्लक्चुएशंस हमारी सोच पर भी निर्भर करते हैं। तो, जितनी ज़्यादा हो सके, उतनी पॉज़िटिव सोच रखें और एक ख़ुशहाल जीवन जीएं!










