Myanmar Earthquake News: म्यांमार में रविवार को एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.1 थी, जिसका केंद्र मांडले से 13 मील उत्तर-पश्चिम में था। यह झटका दोपहर 12 से 1 बजे के बीच आया। हालांकि, नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने तीव्रता 4.6 और यूरोपियन-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर (EMSC) ने 5.2 मापी। इससे पहले 28 मार्च को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने म्यांमार और थाइलैंड में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 1,644 लोगों की मौत और 3,400 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे।
28 मार्च की तबाही के बाद फिर हिली धरती
28 मार्च को म्यांमार के सागाइंग क्षेत्र के पास आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने मांडले सहित कई इलाकों में इमारतें ढहा दीं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद आए कई आफ्टरशॉक ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। रविवार का 5.1 तीव्रता का झटका उसी क्षेत्र में महसूस किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। म्यांमार की सैन्य सरकार के मुताबिक, पिछले भूकंप में 139 लोग अभी भी लापता हैं और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। मांडले के नजदीकी अमरापुरा में बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन भारी मशीनरी की कमी के कारण राहत कार्यों में देरी हो रही है।
भारत का ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’
भूकंप से प्रभावित म्यांमार की मदद के लिए भारत ने तुरंत कदम उठाया। शनिवार को ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से 15 टन राहत सामग्री यांगोन पहुंचाई गई। इसमें टेंट, कंबल, खाद्य पैकेट, दवाइयां और जनरेटर शामिल हैं। इसके अलावा, 80 सदस्यीय NDRF टीम और भारतीय सेना की 50 (I) पैरा ब्रिगेड के 118 जवान भी मांडले में बचाव कार्यों में जुटे हैं। भारतीय नौसेना के जहाज INS सतपुड़ा और INS सावित्री 40 टन सहायता सामग्री लेकर यांगोन के लिए रवाना हो चुके हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के सैन्य नेता मिन आंग ह्लाइंग से फोन पर बात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “भारत म्यांमार के लोगों के लिए पहला सहारा बनकर खड़ा है।” भारत और म्यांमार 1,643 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, जिससे यह सहायता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
USGS के मुताबिक, म्यांमार सागाइंग फॉल्ट पर स्थित है, जो एक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र है। 28 मार्च का भूकंप सदी का सबसे शक्तिशाली झटका था, और इसके बाद कई आफ्टरशॉक की आशंका जताई जा रही है। रविवार का भूकंप भी इसी का हिस्सा माना जा रहा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मृतकों की संख्या 10,000 तक पहुंच सकती है, क्योंकि कई इलाकों में अभी तक राहत टीमें नहीं पहुंच पाई हैं।