SIR मे बड़ी गड़बड़ी का आरोप, आनंद शर्मा ने SIR प्रक्रिया को रद्द करने कि मांग सियाशी हलचल मे उछाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शिमला में एक बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के इस संशोधन कार्य में गंभीर कानूनी और संवैधानिक खामियां हैं। आनंद शर्मा ने मांग की है कि इस पूरी कवायद को तुरंत रद्द किया जाए और मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (EROs) तथा राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को चुनावी डेटा तक पूरी पहुंच दोबारा दी जाए।
आनंद शर्मा का कहना है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे और हर पात्र वयस्क नागरिक के वोट देने के अधिकार की रक्षा करे। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरीके से यह संशोधन किया जा रहा है, उससे विश्वास की कमी पैदा हुई है। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों के नाम काटे जाने पर चिंता जताई जो हाल के वर्षों में मतदान के योग्य हुए हैं।
2002 की सूची को आधार बनाने पर उठाए सवाल
पूर्व मंत्री ने इस बात पर हैरानी जताई कि इस संशोधन के लिए साल 2002 की मतदाता सूचियों को संदर्भ बिंदु (Reference Point) के रूप में क्यों चुना गया। उन्होंने सवाल किया कि 24 साल पहले की सूची को आधार बनाने का कानूनी आधार क्या है और उन करोड़ों युवाओं का क्या होगा जो इस बीच पैदा हुए या मतदान के योग्य हुए हैं? उन्होंने इस चयन को मनमाना करार देते हुए कहा कि इससे युवाओं में आक्रोश और चिंता है।
प्रणाली की खामियों पर चर्चा करते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि पहले एक लाख से अधिक EROs डेटा अपलोड करने में शामिल होते थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था को केंद्रीकृत कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब केवल तीन-चार लोग ही इस पूरे सिस्टम को संभाल रहे हैं, जबकि देश की आबादी 150 करोड़ है।
"नया सिस्टम गहरे दोषों से भरा है। इसमें किसी का भरोसा नहीं है। न तो EROs, न DEOs और न ही राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की इस तक पहुंच है। अगर किसी का नाम कट जाता है, तो अधिकारी असहाय महसूस करेंगे।"
आनंद शर्मा ने जोर देकर कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत ही नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पारदर्शिता बहाल करने के लिए डेटा एक्सेस को फिर से अधिकारियों को सौंपा जाए ताकि विसंगतियों को दूर किया जा सके।