लद्दाख के लिए ऐतिहासिक दिन: अब न्याय के लिए नहीं जाना होगा श्रीनगर या कही और लद्दाख हाई कोर्ट की बेंच का हुआ उद्घाटन

Sonu Nigam20 October 20262 min read0 viewsदेश
लद्दाख के लिए ऐतिहासिक दिन: अब न्याय के लिए नहीं जाना होगा श्रीनगर या कही और लद्दाख हाई कोर्ट की बेंच का हुआ उद्घाटन

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के लोगों के लिए न्याय पाना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगा। रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने लेह के मेलोंगथांग में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की नवनियुक्त लद्दाख बेंच का औपचारिक उद्घाटन किया। यह कदम लद्दाख के उन निवासियों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें अब अपनी कानूनी कार्यवाही के लिए लंबी दूरी तय कर श्रीनगर या जम्मू जाने की जरूरत नहीं होगी।

इस खास मौके पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम एम सुंदरेश, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस अरुण पल्ली सहित कई दिग्गज न्यायिक हस्तियां मौजूद रहीं। साथ ही लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरामणि ने भी इस समारोह की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम की शुरुआत गार्ड ऑफ ऑनर और राष्ट्रगान के साथ हुई, जिसके बाद CJI ने उद्घाटन पट्टिका का अनावरण किया।

डिजिटल क्रांति और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

न्याय को आम आदमी के करीब लाने के साथ-साथ इस बेंच को आधुनिक तकनीक से भी लैस किया गया है। CJI ने इस अवसर पर चार महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की, जिनमें डिजिटल और पर्यावरणीय पहल शामिल हैं:

  • ई-फाइलिंग पोर्टल: अब दूर-दराज के इलाकों के वकील और मुकदमों से जुड़े लोग बिना यात्रा किए इलेक्ट्रॉनिक तरीके से अपने केस फाइल कर सकेंगे।
  • डॉक्यूमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (DMS): न्यायिक रिकॉर्ड्स के डिजिटल प्रबंधन के लिए इस सिस्टम की शुरुआत की गई है।
  • ऑनलाइन रिक्रूटमेंट पोर्टल: हाई कोर्ट और जिला न्यायपालिका में भर्तियों को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए इस पोर्टल को लॉन्च किया गया।
  • ग्रीन वॉल: पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए 'ग्रीन वॉल' पहल की शुरुआत की गई।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने अपने संबोधन में कहा कि दुनिया के सबसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में से एक में संवैधानिक न्यायालय की स्थापना करना एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। वहीं, उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने इसे क्षेत्र में न्याय तक पहुंच मजबूत करने वाला एक मील का पत्थर बताया। इस समारोह में लेह और कारगिल की बार एसोसिएशन के अध्यक्षों सहित सेना और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

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