सड़को पर उतरे किसान :CM ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- केंद्र बात करे वरना होगा बड़ा नुकसान

Sonu Nigam19 October 20263 min read0 viewsदेश
सड़को पर उतरे किसान :CM ने PM मोदी को लिखा पत्र, कहा- केंद्र बात करे वरना होगा बड़ा नुकसान

कर्नाटक में गन्ना किसानों के बढ़ते आक्रोश और विरोध प्रदर्शनों ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है। उत्तर कर्नाटक में किसान अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे गन्ने की पेराई (क्रशिंग सीजन) में देरी हो रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में बताया कि उत्तर कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और हुब्बल्ली की ओर पदयात्रा निकाल रहे हैं। उनका उद्देश्य केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास का घेराव करना है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी है, लेकिन किसानों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है।

खेतों में खड़ा है गन्ना, किसानों और मिलों का बढ़ रहा नुकसान

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 17 अक्टूबर को बेलगावी जिले के कित्तूर में प्रदर्शनकारी किसानों से मुलाकात की थी। उन्होंने किसानों से पदयात्रा वापस लेने की अपील की, लेकिन किसानों का स्पष्ट कहना है कि उनकी मुख्य मांगें केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, इसलिए जब तक केंद्र से आश्वासन नहीं मिलता, वे आंदोलन बंद नहीं करेंगे।

CM ने चेतावनी दी है कि इस देरी से फसल की गुणवत्ता और वजन कम हो रहा है, जिससे किसानों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। साथ ही, सड़कों पर हो रहे जाम से आम जनता को भी काफी परेशानी हो रही है।

राज्य सरकार ने अपनी ओर से कई कदम उठाए हैं, जैसे कि:

  • सभी 81 चालू मिलों में एनालॉग के बजाय डिजिटल लोड सेल लगाए गए हैं ताकि वजन में गड़बड़ी न हो।
  • गन्ने की रिकवरी और वजन की जांच के लिए जिला स्तरीय टीमें बनाई गई हैं।
  • सरकार ने मिलों द्वारा तय कीमत के ऊपर किसानों को 100 रुपये प्रति टन अतिरिक्त भुगतान सुनिश्चित किया है, जिसमें से 50 रुपये राज्य सरकार ने खुद दिए हैं। इसके तहत करीब 290 करोड़ रुपये किसानों को सीधे दिए जा चुके हैं।

केंद्र से इन 5 मुख्य मांगों पर फैसले की अपील

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि भले ही रमेश चंद की अध्यक्षता वाली समिति काम कर रही हो, लेकिन कुछ फैसले तुरंत लिए जाने चाहिए। उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दिलाने की मांग की है:

  1. चीनी के MSP में संशोधन: चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि FRP बढ़ चुका है। पुराने MSP पर मिलें किसानों को उचित दाम नहीं दे पा रही हैं।
  2. घरेलू और व्यावसायिक चीनी के लिए अलग MSP: ताकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिले और थोक खरीदारों से उचित दाम वसूला जा सके।
  3. इथेनॉल खरीद नीति की समीक्षा: गन्ने के रस और सिरप से बने इथेनॉल को खरीद निविदा (Tender) से बाहर रखा गया है, जिससे मिलों के राजस्व पर असर पड़ेगा और किसानों के भुगतान में देरी होगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार केंद्र की समिति के साथ पूरा सहयोग करेगी, लेकिन किसानों के हित में त्वरित निर्णय लेना अब अनिवार्य हो गया है।

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