राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (NBA) तथा राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद (SBTE), बिहार के संयुक्त तत्वावधान में आज पटना स्थित डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी सभागार में राज्य के सरकारी पॉलिटेक्निक एवं अभियंत्रण महाविद्यालयों के लिए आउटकम-बेस्ड एजुकेशन एवं एनबीए एक्रेडिटेशन विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य तकनीकी शिक्षण संस्थानों को एक्रेडिटेशन प्रक्रिया, मूल्यांकन प्रणाली तथा गुणवत्ता आश्वासन के मानकों के प्रति व्यावहारिक रूप से तैयार करना था।
कार्यशाला में एनबीए एक्रेडिटेशन की रूपरेखा, मूल्यांकन पद्धति, वॉशिंगटन एकॉर्ड के तहत अंतरराष्ट्रीय मान्यता, जीएपीसी संस्करण 4.0 तथा सेल्फ-असेसमेंट रिपोर्ट–2024 की तैयारी जैसे विषयों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही कोर्स आउटकम, प्रोग्राम आउटकम एवं प्रोग्राम एजुकेशनल ऑब्जेक्टिव्स के आकलन, मूल्यांकन टूल्स के उपयोग तथा मूल्यांकन के आधार पर पढ़ाई और शिक्षण पद्धति में लगातार सुधार की प्रक्रिया को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। अभियंत्रण महाविद्यालयों एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों के लिए अलग-अलग सत्र आयोजित कर प्रत्यायन की आवश्यकताओं को संस्थागत स्तर पर लागू करने पर मार्गदर्शन दिया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. चंद्रशेखर सिंह, सचिव, राज्य तकनीकी शिक्षा परिषद, बिहार ने कहा कि बिहार के पॉलिटेक्निक संस्थान कौशल आधारित शिक्षा एवं रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आउटकम-बेस्ड एजुकेशन के माध्यम से पढ़ाई को छात्रों की वास्तविक दक्षताओं और रोजगार-योग्यता से जोड़ा जा रहा है, जिससे संस्थानों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होती है।
प्रो. सुरेश कांत वर्मा, कुलपति, बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय ने कहा कि अभियंत्रण महाविद्यालयों में कोर्स आउटकम और प्रोग्राम आउटकम के स्पष्ट निर्धारण से शिक्षण और मूल्यांकन अधिक प्रभावी बनते हैं। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय स्तर पर संस्थानों को एक्रेडिटेशन की तैयारी के लिए अकादमिक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है, ताकि सेल्फ-असेसमेंट रिपोर्ट जैसी प्रक्रियाएँ सरल और व्यवस्थित हो सकें।
अपने संबोधन में प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे, अध्यक्ष, राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड ने कहा कि एनबीए एक्रेडिटेशन तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता आश्वासन का भरोसेमंद माध्यम है। उन्होंने बताया कि इससे संस्थानों की प्रक्रियाएँ सरल होती हैं, जिम्मेदारियाँ स्पष्ट होती हैं और निर्णय प्रणाली अधिक पारदर्शी बनती है। उन्होंने इसे तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में ईज़ ऑफ डूइंग एजुकेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए नवाचार और निरंतर सुधार पर बल दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक, विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, श्री अहमद महमूद ने कहा कि राज्य के सरकारी पॉलिटेक्निक एवं अभियंत्रण महाविद्यालयों में अत्यंत न्यूनतम शुल्क पर उच्च गुणवत्ता की तकनीकी शिक्षा दी जा रही है, जिसका सीधा असर छात्रों के रोजगार और स्वरोज़गार के अवसरों में दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग एक्रेडिटेशन के माध्यम से तकनीकी संस्थानों में गुणवत्ता आश्वासन को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यशाला में विभाग के वरीय पदाधिकारियों के साथ-साथ विभाग के अधीन संचालित सभी सरकारी पॉलिटेक्निक एवं अभियंत्रण महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने भी भाग लिया।







