हरेन्द्र का प्रताप – 89
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दैनिक स्तंभ
भारत में अनेक सरकारी विभाग ऐसे हैं जिन पर आप जितने भी डिजिटल पहरे लगा लो, वे अपनी परंपरा को कायम रखने में कामयाब हो ही जाते हैं और सरकारी व्यवस्था मूकदर्शक बनी रह जाती है ! इसमें कहीं – कहीं जनता का भी भरपूर सहयोग मिलता है ! ये ख्यातिप्राप्त सरकारी विभाग हैं – रेलवे, पुलिस, कोर्ट – कचहरी, जेल, इनकम टैक्स, कस्टम-एक्साइज , ऑडिट, अस्पताल, विद्यालय, महाविद्यालय, विश्वविद्यालय, सड़क परिवहन, रजिस्ट्री ऑफिस, नगरपालिका, लाइसेंस, सब्सिडी से जुड़ी योजनाओं के कार्यालय, इंश्योरेंस, राहत व्यवस्था, प्रशिक्षण, वन – उद्यान, सहकारिता, कोलियरी, श्मशान घाट इत्यादि।
फिलहाल रेलवे के ह्रास के विकास पर एक नजर डालते हैं। हाल-फिलहाल दो रूट पर मुझे ह्रास और विकास तथा ह्रास का विकास एवं विकास का ह्रास कुछ स्पष्ट नजर आया। इन दो रूट की दो महत्वपूर्ण ट्रेन का नाम है – रीवा एक्सप्रेस जो दिल्ली के आनंद विहार से मध्य प्रदेश के रीवा जाती है। दूसरी ट्रेन है समता एक्सप्रेस जो दिल्ली के निजामुद्दीन से विशाखापत्तनम जाती है। इन दोनों रूटों पर ट्रेन और सवारी दोनों का व्यवहार भी बड़ा दिलचस्प है। इन ट्रेनों में वापसी में कुछ और ही व्यवहार नजर आता है जो अद्भुत है। इन ट्रेनों में कार्यरत सरकारी और अनुबंध आधारित सरकारी कर्मचारी – अधिकारी भी दिलचस्प हैं। यही नहीं, दैनिक रूप से आर्थिक सहयोग मांगने वाले लोगों का काफिला भी दर्शनीय है !







