हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
सहारनपुर, 21 जनवरी। उत्तर प्रदेश में बनारस, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के साथ – साथ सहारनपुर भी शिक्षा का एक प्रमुख केन्द्र बन गया है। लेकिन शहर और शिक्षा का स्तर अपेक्षित नहीं होने के कारण यहां आने वाले विद्यार्थियों की संख्या उतनी नहीं बढ़ पायी है जितनी इस शहर की प्रशासनिक व्यवस्था और विभिन्न शिक्षा केन्द्रों से अपेक्षा की जाती है।
सहारनपुर शिक्षा में अंतर राज्यीय केंद्र के रूप में पिछले दस वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यह लोकप्रियता शहर की व्यवस्था और कुकुरमुत्ते की तरह उग आए शिक्षा केन्द्रों की गुणवत्ता के कारण नहीं है बल्कि यह विभिन्न परीक्षाओं में परीक्षार्थियों को मिलने वाली “सुविधाओं ” और समय पर परीक्षा होने के कारण है। इससे विद्यार्थियों को समय पर डिग्री एवं डिप्लोमा मिल जाते हैं और वे इस आधार पर अपना कैरियर संवारने में लग जाते हैं।

विभिन्न प्रकार की सुविधाओं एवं रियायतों के कारण न सिर्फ उत्तर प्रदेश में आस पास के जिलों से बल्कि विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां से डिग्री एवं डिप्लोमा अर्जित कर रहे हैं। प्रमुख राज्यों में उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के विद्यार्थी अच्छी संख्या में सहारनपुर का सहारा लेने आते हैं।
सहारा के साथ – साथ विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों को यदि ज्ञान और व्यवस्था का लाभ भी यदि मिलने लगे तो सहारनपुर शिक्षा जगत में सम्माननीय दर्ज़ा प्राप्त कर लेगा अन्यथा डिग्री या डिप्लोमा की व्यवस्था करने वाले शहर की श्रेणी में अंकित होकर रह जाएगा।







