'100 Years of RSS ', संघ का सफर और इतिहास मे रूचि रखने वालो की लिए बेमिसाल किताब लेखिका रश्मि सामंत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल पूरे होने के मौके पर लेखिका रश्मि सामंत ने एक बेहद दिलचस्प नजरिया पेश किया है। अपनी नई किताब 'Hundred Years Young: Rashtriya Swayamsevak Sangh' के जरिए उन्होंने बताया कि संघ को किसी एक नजरिए से या बहुत कम समय में समझना नामुमकिन है। रश्मि सामंत का मानना है कि RSS कोई साधारण संगठन नहीं है, बल्कि यह 'पीढ़ियों का काम' (generational work) करता है।
लेखिका के अनुसार, संघ का मुख्य उद्देश्य 'मनुष्य निर्माण' है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो एक-दो दिन में पूरी नहीं होती, बल्कि इसमें पीढ़ियां लगती हैं। उन्होंने कहा कि अब तक केवल चार पीढ़ियां ही बीती हैं, जबकि संघ का लक्ष्य इतना विशाल है कि 100 साल का समय इसके लिए महज एक शुरुआत जैसा है।
किताब के पीछे की रिसर्च और विविध नजरिए
रश्मि सामंत ने बताया कि इस किताब को लिखने की रिसर्च ने उन्हें अंदर से बदल दिया। उन्होंने महसूस किया कि संघ के कामकाज की गहराई समुद्र जैसी है, जिसे पूरी तरह खंगालना मुश्किल है। अक्सर लोग RSS को या तो बहुत ज्यादा सराहते हैं या फिर कड़ी आलोचना करते हैं, लेकिन रश्मि का कहना है कि समाज में 'रंगीन चश्मे' के बजाय वास्तविक अनुभवों को साझा करने वालों की कमी है।
इसी कमी को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी किताब में 20 युवा योगदानकर्ताओं को शामिल किया है, जो अलग-अलग पहचान और पृष्ठभूमि से आते हैं। इस किताब में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और यहूदी धर्म के लोगों के साथ-साथ LGBTQIA+ समुदाय के युवाओं के विचार भी शामिल हैं।
लेखिका का कहना है कि पिछले 100 वर्षों में भारत और दुनिया के इतिहास पर संघ का गहरा प्रभाव रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पाठक इस किताब के माध्यम से तर्क और लॉजिक के आधार पर संघ को समझेंगे, न कि उन पूर्वाग्रहों के आधार पर जो समाज में पहले से मौजूद हैं।