मैं वापस आऊंगा: भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी न्यूजीलैंड दौरे से हुए बाहर

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी एक बार फिर चयनकर्ताओं की नजरों से दूर रहे। न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए जब भारतीय टीम का ऐलान हुआ, तो 36 वर्षीय शमी का नाम एक बार फिर गायब था। इस फैसले ने न केवल फैंस को हैरान किया, बल्कि शमी के मन में भी कई सवाल पैदा किए हैं। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी मेहनत पर भरोसा जताने का फैसला किया है।
नई दिल्ली में बंगाल और दिल्ली के बीच चल रहे रणजी ट्रॉफी मैच के दौरान शमी ने अपनी भावनाओं को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा सकारात्मक रहते हैं और हर मैच में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। शमी का मानना है कि मैदान पर लगातार खेलना ही उनके लिए सबसे जरूरी है, क्योंकि इससे न केवल उनकी लय बनी रहती है, बल्कि उनके कौशल में भी निखार आता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मैं बस खेलता रहना चाहता हूं और अपना बेस्ट देना चाहता हूं। इसके अलावा मैं और क्या कर सकता हूं?"
सोशल मीडिया से दूरी और घरेलू क्रिकेट पर फोकस
भारतीय टीम में वापसी की राह आसान नहीं है, खासकर जब चयन समिति में बदलाव हुआ हो। अजीत अगरकर के बाद अब प्रज्ञान ओझा ने मुख्य चयनकर्ता की कमान संभाली है। इस बदलाव और बाहरी शोर से बचने के लिए शमी ने एक कड़ा फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद को पूरी तरह से सोशल मीडिया से दूर कर लिया है।
शमी ने स्पष्ट किया कि वह दूसरों की गतिविधियों पर ध्यान देने के बजाय अपनी प्रैक्टिस और स्किल डेवलपमेंट पर समय निवेश कर रहे हैं। उनका लक्ष्य इस पूरे घरेलू सीजन को खेलना है ताकि वह शारीरिक और मानसिक रूप से फिट रह सकें। 2027 के वनडे वर्ल्ड कप को लेकर जब उम्र की बात आती है, तो शमी का कहना है कि वह अपनी कोशिशें जारी रखेंगे और बाकी सब ईश्वर के हाथ में है।
गौरतलब है कि शमी ने पिछले साल मार्च में चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। घरेलू क्रिकेट में भी उनका रिकॉर्ड दमदार रहा है; उन्होंने रणजी ट्रॉफी और दलीप ट्रॉफी में अपनी गेंदबाजी से कहर बरपाया है। भले ही आईपीएल में उनके आंकड़े उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, लेकिन घरेलू सर्किट पर उनकी पकड़ ने यह उम्मीद जगाई रखी है कि वह जल्द ही नीली जर्सी में नजर आएंगे।