भारत की Space इकोनॉमी 8 साल में 45 अरब डॉलर , निजी निवेश बनेगा गेमचेंजर

Sonu Nigam17 October 20262 min read0 viewsटेक्नोलॉजी
भारत की Space इकोनॉमी 8 साल में 45 अरब डॉलर , निजी निवेश बनेगा गेमचेंजर

भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में अब केवल अपनी तकनीकी क्षमता दिखाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में एक ग्लोबल कमर्शियल पावरहाउस बनने की तैयारी में है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने एक बड़ा अनुमान साझा करते हुए कहा है कि भारत की स्पेस इकोनॉमी, जो फिलहाल करीब 9 अरब डॉलर है, वह अगले सात से आठ वर्षों में बढ़कर 40 से 45 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।

नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम द्वारा आयोजित एक मीडिया राउंडटेबल के दौरान मंत्री सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए निजी निवेश सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अब ऐसी व्यावसायिक अंतरिक्ष कंपनियां खड़ी करनी होंगी जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

निजी कंपनियों के लिए सरकार बनेगी 'एंकर कस्टमर'

मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2019-2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलना एक बड़ा कदम था, जिसके सकारात्मक परिणाम भी दिख रहे हैं। हालांकि, अब चुनौती तकनीकी क्षमता को टिकाऊ बिजनेस मॉडल में बदलने की है। इस दिशा में सरकार एक खास रणनीति अपना सकती है, जहां सरकारी संस्थान निजी कंपनियों के लिए 'एंकर कस्टमर' के तौर पर काम करेंगे। इससे कंपनियों को अपनी तकनीक टेस्ट करने और उसे बाजार में उतारने का भरोसा मिलेगा।

विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए मंत्री ने कुछ अन्य जरूरी सुधारों का भी जिक्र किया, जिनमें शामिल हैं:

  • एक्सपोर्ट लाइसेंस और रेगुलेटरी मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज करना।
  • बिजनेस की लागत को कम करना और सप्लाई चेन को मजबूत बनाना।
  • स्पेस प्रोडक्ट्स से जुड़े GST सुधारों का सीधा लाभ कंपनियों तक पहुंचाना।
  • घरेलू और विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, ताकि रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सैटेलाइट कम्युनिकेशन, अर्थ ऑब्जर्वेशन और जियोस्पेशियल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं। इनका इस्तेमाल कृषि, डिजास्टर मैनेजमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और डिफेंस जैसे महत्वपूर्ण सेक्टरों में किया जा सकता है। अंत में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी और कुशल नियमों के तालमेल से ही भारत दुनिया की अग्रणी स्पेस कंपनियों का घर बन पाएगा।

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