श्रीनाथ दीक्षित, वरिष्ठ संवाददाता, दिल्ली
कहते हैं कि कला किसी भी औपचारिक परिचय की मोहताज नहीं होती! कला तो, ईश्वर का दिया हुआ वो वरदान माना जाता है, जिससे ना सिर्फ़ एक इंसान समाज में एक अलग ही पहचान और सम्मान ही पाता है; बल्कि, उसे अपने जीवनयापन का एक हिस्सा बना अपनी गुजर-बसर भी अच्छे से कर सकता है।
और, वैसे भी भारत देश है कलाकारों का! यहाँ हर घर-परिवार में हर एक व्यक्ति कोई-ना-कोई अद्भुत और अनोखी कलाओं में निपुण पाया जा सकता है!
और-तो-और, इन कलाकारों की अनोखी कलाओं को देखकर सभी अचंभित भी रह जाते हैं और बस! सभी के मुँह से यही निकलता है कि “भई! वाह! हमें तो, बिल्कुल भी आइडियी ही नहीं था कि यह व्यक्ति इतनी अद्भुत कला का धनी है!”
क्यों? होता है ना हम सभी के साथ भी कुछ ऐसा ही!
इसी के साथ ही अगर बीत करें; घर की महिलाओं की! तो, वो हर चीज़ को सहेजने में बड़ी मुस्तैदी से तैयार रहतीं हैं! फिर चाहे वो कोई भी सामान हो! वो यह कहकर उसे संभालकर घर के किसी भी कोने में इसलिए रख देंगी कि क्या पता, कब और कैसे इसकी ज़रूरत पड़ जाए! क्यों? लेडीज़! होता है ना आपके साथ भी कुछ ऐसा ही!

भई! यूँ तो, अमूमन अपने रोज़मर्रा के जीवन में हम सभी लोग अपने घर में टूटे हुए सामानों को ठिकाने लगाने के लिए या तो, उन्हें कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं या फिर उन्हें भविष्य में किसी-ना-किसी रूप में इस्तेमाल कर सकने के लिए घर के किसी भी कोने में बस! यूँ ही उठाकर रख देते हैं। फिर, चाहे वो टूटा हुआ कोई प्लास्टिक का डिब्बा हो या फिर, कोई मोबाइल में इस्तेमाल होने वाले चार्जर या ईयरफ़ोन की लीड ही क्यों ना हों! वैसे, इस तरह के सामानों को अमूमन ज़रा-सा ख़राब होने पर हम उन्हें तोड़कर कचरे के डिब्बे में डाल देते हैं।
इससे हमें उस पुराने टूटे हुए सामान से छुटकारा तो, मिल जाता है। लेकिन, कभी आपने यह सोचा है कि आपके बेकार और ख़राब सामान से भी कुछ बहुत ही ख़ूबसूरत कला को एक आकार देकर एक बेहद ही नायाब कलाकृति भी तैयार की जा सकती है!
नहीं! ना! तो, ऐसे ही कुछ नायाब आर्टिस्ट हैं हमारे हरियाणा के फ़रीदाबाद के एतमादपुर गाँव में रहने वाले श्री उदित नारायण बैंसला साहब!
उदित साहब की कला को देखकर रह जाते हैं सभी दंग!
इनके हुनर को देखकर सभी लोग दाँतों-तले अपनी अँगुली दबाकर रह जाते हैं। और-तो-और, इनकी इस नायाब कला को देखकर सभी के मुँह से बस! यही निकलता है – “वाह! क्या अद्भुत और ख़ूबसूरत कला है! मान गए! गुरु!”
क्या है यह कला?
जी! हाँ! उदित नारायण बैंसला के पास है एक ऐसी अद्भुत और अनोखी कला, जिससे आपको मिल रहा है अपने उन बेकार या ख़राब हुए ईयरफ़ोन वाली लीड से अपना भी एक बेहद ख़ूबसूरत-सा पोर्ट्रेट तैयार करवाने का एक बेहतरीन मौक़ा!
आपको करना क्या होगा?
इसके लिए आपको सिर्फ़ करना इतना-सा काम है कि आपको उदित साहब को अपना एक फ़ोटो और अगर हो सके; तो (जिस भी कलर में अपना पोर्ट्रेट तैयार करवाना है), उस कलर की ईयरफ़ोन वाली लीड उनको दे देनी है। और, अगर हो सके; तो, अपने पुराने और टूटे हुए या बेकार पड़े बिजली के तार, प्लास्टिक के कप-प्लेट या प्लास्टिक के शो पीस के टुकड़े और फ़र्नीचर में इस्तेमाल होने वाली मोल्डिंग टेप; इत्यादि, भी आप इन्हें दे सकते हैं।
फिर, आपकी पसंद के साइज़ के हिसाब से उदित साहब आपके पोर्ट्रेट को कुछ ही समय में तैयार करके आपको दे देंगे!
किया जा चुका है स्टेट गॉवर्नमेंट अवॉर्ड से सम्मानित!
श्री उदित की इस अद्भुत कला के लिए उन्हें हरियाणा सरकार से कलानिधि पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है।
इसके साथ ही उदित भविष्य में अब भारत सरकार के द्वारा दिए जाने वाले प्रतिष्ठित नैशनल अवॉर्ड के लिए भी कोशिश करेंगे।
कैसे हुई इस अनोखी कला को रूप देने की शुरुआत?
टैक्सटाइल डिज़ाइनर के रूप में काम करने वाले उदित बैंसला ने काफ़ी समय तक इस टैक्सटाइल्स डिज़ाइनिंग के क्षेत्र में अपना योगदान दे चुके थे। लेकिन, वो कहते हैं ना हमें भी नहीं पता होता कि हमारी क़िस्मत में क्या लिखा है!
तो, उदित बैंसला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ! शुरुआत से ही पर्यावरण-प्रेमी उदित पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए आतुर रहते थे।
फिर, साल – 2016 में माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी के “मन की बात” कार्यक्रम में स्वच्छ भारत अभियान के आह्वान से प्रेरित होकर उदित साहब ने यह अनोखी पहल की शुरुआत की।
उदित बताते हैं कि एक बार रात को अपने घर के पास ही एक गली में कुछ लड़कों को बिजली के ख़राब तारों को जलाते देख उदित ने इन्हीं बेकार तारों को सहेज एक ख़ूबसूरत आकार देने का निर्णय लिया।
बस! फिर, क्या था! उदित साहब के द्वारा इस पहल को माननीय प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा भी सराहा जा चुका है।
अब तक बना चुके हैं 5,000 से भी ज़्यादा आकृतियाँ!
उदित इन्हीं बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले सामानों से क़रीब 5,000 से भी ज़्यादा मनमोहक आकृतियाँ तैयार कर चुके हैं।
युवाओं को भी दे रहे इस अनोखी कला की ट्रेनिंग!
अपनी इस अनोखी कला के विस्तार के लिए उदित बैंसला अब स्कूल, कॉलेज और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत कला प्रेमियों को भी अपनी इस कला को तैयार करने की ट्रेनिंग्स भी दे रहे हैं।








