पटना | पटना का भारतीय नृत्य कला मंदिर शुक्रवार को उस समय सांस्कृतिक चेतना और सृजनात्मक ऊर्जा से सराबोर हो उठा, जब कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘वसंतोत्सव’ का शानदार आगाज हुआ। यह शाम केवल ऋतुराज वसंत के स्वागत की नहीं थी, बल्कि कला के पुनर्जीवित होते गौरव की भी साक्षी बनी।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि माननीय मंत्री, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार श्री अरुण शंकर प्रसाद ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री प्रणव कुमार, भा.प्र.से., सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार की गरिमामयी उपस्थिति रही।

साधना और शौर्य का अद्भुत संयोग
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री श्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा, “आज का दिन एक दिव्य त्रिवेणी जैसा है। एक ओर हम विद्या की देवी माँ सरस्वती की आराधना कर रहे हैं, तो दूसरी ओर राष्ट्र नायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मना रहे हैं। वसंत हमारी लोक-परंपराओं को वह मंच देता है जहाँ सृजन और सजगता एक साथ मिलते हैं।” उन्होंने कलाकारों को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना का लाभ उठाने की अपील की और घोषणा की कि पुनर्जीवित मुक्ताकाश मंच आने वाले समय में कला-साधना का सबसे बड़ा केंद्र बनेगा।
स्मृतियों के साथ नया सवेरा
विभागीय सचिव श्री प्रणव कुमार ने कार्यक्रम के भावुक क्षणों को साझा करते हुए कहा कि मुक्ताकाश मंच का जीर्णोद्धार एक संकल्प था, जो आज मंत्री जी के सहयोग से साकार हुआ है। उन्होंने कला-प्रेमियों से अपनी गौरवशाली विरासत को संजोने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता दिल

नवजीवन और नवसृजन का प्रतीक
सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक श्रीमती रूबी ने वसंतोत्सव एवं सरस्वती पूजा की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि यह दिन नवजीवन और नवसृजन का प्रतीक है। खुले आकाश के नीचे यह मंच कलाकारों को अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का अनूठा अवसर प्रदान करेगा तथा कला एवं कलाकारों के हित में यह एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
माननीय मंत्री एवं विभागीय सचिव के मार्गदर्शन से संभव
स्वागत संबोधन में भारतीय नृत्य कला मंदिर की प्रशासी पदाधिकारी सुश्री कहकशां ने माननीय मंत्री, विभागीय सचिव, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक, विभाग के संयुक्त सचिव, उपस्थित अधिकारियों, कलाकारों, एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड के विद्यार्थियों एवं कला-प्रेमियों का हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि लगभग एक दशक बाद इस मुक्ताकाश मंच को पुनः कला-प्रेमियों को समर्पित करते हुए उन्हें अत्यंत हर्ष का अनुभव हो रहा है, जो माननीय मंत्री एवं विभागीय सचिव के कुशल मार्गदर्शन से संभव हो सका है।

वसंतोत्सव की शाम कला के विभिन्न रंगों से सजी रही:
फ्यूजन का तड़का: मुंबई से आए प्रसिद्ध कलाकार देवेश मिरदानी ने अपनी फ्यूजन नृत्य प्रस्तुति से परंपरा और आधुनिकता का ऐसा मेल दिखाया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
सुरों की सरिता: पटना के जाने-माने गायक आलोक चौबे के गीतों ने वातावरण में एक रूहानी मिठास घोल दी।
ब्रज का वैभव: उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (प्रयागराज) के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत ‘फूलों की होली’ और ‘मयूर नृत्य’ ने मंच पर साक्षात ब्रज का उत्सव जीवंत कर दिया।







