वर्टिकल गार्डनिंग आधुनिक शहरी जीवनशैली में उभरती ऐसी बागवानी पद्धति है, जिससे फ्लैट, बालकनी या दीवारों पर पौधे लगाए जा सकते हैं। कम जगह में हरियाली लाने का यह तरीका घर की सुंदरता बढ़ाने के साथ बेहतर वातावरण बनाने में मददगार माना जाता है।
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पेड़ों की कटाई के बीच लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में वर्टिकल गार्डनिंग घर के भीतर छोटे स्तर पर हरित वातावरण तैयार करने का एक विकल्प बनकर सामने आई है। इससे घर में ताजी हवा और सुकून भरा माहौल बनाने में मदद मिलती है।

हवा की गुणवत्ता और सेहत से जुड़ाव
इस पद्धति में लगाए गए पौधे वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्वों, खासकर कार्बन डाइऑक्साइड जैसे गैसों को नियंत्रित करने में सहायक माने जाते हैं। इसके जरिए घर के अंदर अपेक्षाकृत स्वच्छ हवा और हरित माहौल तैयार किया जा सकता है।
माना जाता है कि दुनिया के शुरुआती बड़े वर्टिकल गार्डन का उदाहरण चीन के नानजिंग शहर में बना दो टावरों वाला गार्डन है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें लगे पौधे बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन उत्पादन से जुड़े बताए जाते हैं। इटली के वास्तुकार स्टेफानो बोएरी द्वारा डिजाइन किए गए इन टावरों में हजारों पौधे और झाड़ियां लगाई गई हैं।
लंदन के विक्टोरिया स्टेशन के पास भी “लिविंग वॉल” के रूप में बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए हैं, जिन्हें वर्षा जल के सहारे संरक्षित किया जाता है।
भारत में भी राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में फ्लाईओवर के नीचे, मेट्रो परिसरों के पास और सरकारी इमारतों की दीवारों पर वर्टिकल गार्डनिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर की खूबसूरती के साथ हरित आवरण बढ़ाना है।

कितने खर्च में बनता है वर्टिकल गार्डन?
वर्टिकल गार्डन का खर्च उसके आकार, डिजाइन और इस्तेमाल की गई सामग्री पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर यह लगभग ₹6 हजार से लेकर ₹5 लाख तक के खर्च में तैयार हो सकता है।
कुछ मामलों में गमले या पैनल सिस्टम की लागत अलग से जोड़ी जाती है। संरचना जितनी जटिल होगी, लागत उतनी अधिक हो सकती है।
वर्टिकल गार्डन का ढांचा कैसे काम करता है?
वर्टिकल गार्डन के लिए दीवार पर लगाने योग्य फ्रेम या पैनल संरचना बाजार में उपलब्ध होती है। इनमें छोटे गमलों या पौधों के पॉकेट को कतारों में लगाया जाता है।
इसके बाद मिट्टी, खाद और जरूरी माध्यम भरकर पौधे लगाए जाते हैं। पानी की आपूर्ति के लिए पाइप का एक पैटर्न बनाया जाता है, जिससे सभी पौधों तक बराबर मात्रा में पानी पहुंच सके। यह पाइप पानी की टंकी से जुड़ा होता है।
पानी देने के दो तरीके: मैनुअल और ऑटोमैटिक
वर्टिकल गार्डन में सिंचाई के दो प्रमुख तरीके बताए जाते हैं—मैनुअल और ऑटोमैटिक।
मैनुअल सिस्टम में व्यक्ति स्वयं पाइप या कैन की मदद से पौधों को पानी देता है। इसमें पानी की मात्रा का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है, क्योंकि अधिक पानी से पौधों को नुकसान हो सकता है।
ऑटोमैटिक सिस्टम में पाइपलाइन को टंकी से जोड़कर एक साथ सभी पौधों तक संतुलित मात्रा में पानी पहुंचाया जाता है। यह तरीका पौधों की नियमित देखभाल के लिहाज से अधिक सुविधाजनक माना जाता है।
वर्टिकल गार्डन के लिए उपयुक्त पौधे और फूल
इंडोर वर्टिकल गार्डन के लिए क्लोरोफाइटम कोमोसम, एस्पैरागस, मनी प्लांट, सिंगोनियम, फर्न, मॉस, बेगोनिया, यूफोर्बिया जैसे पौधों का उल्लेख किया जाता है।
इंडोर और आउटडोर दोनों के लिए पैंजी, डायस, पेमुला, वरबिना, एलियम, कैडिटफ, यूफोर्बिया फूल, टिडेनशिया फूल, सदाबहार और लैंटाना जैसे फूल उपयुक्त माने जाते हैं।
वर्टिकल गार्डन की देखभाल के लिए जरूरी बातें
दीवार पर लगे पौधों को तेज धूप और अत्यधिक प्रदूषण से बचाना जरूरी है। इंडोर पौधों को लगातार एयर-कंडीशनर वाले कमरों में रखने से उनकी नमी प्रभावित हो सकती है।
हर पौधे की पानी और धूप की जरूरत अलग होती है, जो उसकी प्रजाति, स्थान और मौसम पर निर्भर करती है। सामान्य रूप से समय-समय पर पानी देना, खाद बदलना और कीट नियंत्रण करना जरूरी बताया जाता है।
मिट्टी में कोको पीट और अन्य माध्यम मिलाने से पौधों को पोषक तत्व मिलते हैं। गमलों की ऊंचाई और संरचना ऐसी होनी चाहिए कि देखभाल में आसानी रहे।
समय-समय पर छंटाई, खाद की अदला-बदली और कीट नियंत्रण से पौधों की उम्र और सेहत बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
यह जानकारी बागवानी विशेषज्ञ डॉ. तोलेटि जानकीराम (पूर्व कुलपति, वाई.एस.आर. हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी और पूर्व सहायक महानिदेशक, बागवानी विज्ञान, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) से बातचीत के आधार पर प्रस्तुत की गई है।







