नई दिल्ली, अप्रैल 2026: जल शक्ति मंत्रालय के अधीन काम करने वाली भारत सरकार की प्रमुख सार्वजनिक कंपनी WAPCOS Limited पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, 31 मार्च 2026 को वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद भी खातों में टर्नओवर और मुनाफा दर्ज किया जा रहा है। कंपनी में फिलहाल डायरेक्टर (फाइनेंस) का पद खाली है, जिसके चलते इस पूरी कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले में विशेषज्ञों ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से विशेष जांच की मांग की है।
बिना फाइनेंस डायरेक्टर चल रहा करोड़ों का लेन-देन
वैपकॉस (WAPCOS) और एनपीसीसी (NPCC) लिमिटेड दोनों ही सरकारी संस्थाओं में इस समय डायरेक्टर फाइनेंस का अहम पद रिक्त है। इस स्थिति में कंपनी का वित्तीय कामकाज बिना किसी वैधानिक प्रमुख के संचालित हो रहा है। प्राप्त शिकायतों और सूत्रों के मुताबिक, सुषमा नाम की एक अधिकारी अनौपचारिक रूप से वित्त विभाग को नियंत्रित कर रही हैं। बिना किसी आधिकारिक पद के उनके द्वारा खातों का प्रमाणीकरण और मुनाफे की स्वीकृति दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं। इससे रेवेन्यू रिकग्निशन के नियमों के उल्लंघन का अंदेशा जताया जा रहा है।
कलेक्शन ड्रिवन सिस्टम और अधिकारियों पर मनमानी के आरोप
संस्था के वित्तीय तंत्र के साथ ही इसके अंदरूनी माहौल पर भी चिंताजनक दावे किए गए हैं। आरोप है कि वित्तीय वर्ष के अंत में एक ‘कलेक्शन ड्रिवन सिस्टम’ चलाया जा रहा है, जिसमें रसीदें और भुगतान बिना उचित ऑडिट ट्रेल के प्रोसेस किए जा रहे हैं। इसके अलावा, प्रदीप कुमार और सुमिर चावला जैसे अधिकारियों पर आरोप हैं कि वे मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और नियमों का पालन करने वाले ईमानदार कर्मचारियों को टारगेट करके सस्पेंड किया जा रहा है।
विजिलेंस और सिस्टम को प्रभावित करने का दावा
इन आरोपों में सबसे गंभीर बात यह निकलकर आ रही है कि रजनीकांत अग्रवाल नामक एक व्यक्ति पर पूरे सिस्टम को प्रभावित करने का दावा किया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसके चलते जल शक्ति मंत्रालय के विजिलेंस विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों (शिंदे) तक इसकी आंच पहुंच रही है। इस स्थिति के कारण संस्था में भय का माहौल है और जवाबदेही तय करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है।
विदेशी प्रोजेक्ट्स पर असर और फोरेंसिक ऑडिट की मांग
कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली इस कंसल्टेंसी कंपनी के कई विदेशी प्रोजेक्ट्स अब बंद या निष्क्रिय होने की कगार पर हैं। इससे भारत सरकार की ब्रांड इमेज को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इन गंभीर हालातों को देखते हुए अंदरूनी सूत्रों ने CAG द्वारा 31 मार्च के बाद की सभी प्रविष्टियों के फोरेंसिक ऑडिट की मांग की है। इसके साथ ही CVC (केंद्रीय सतर्कता आयोग) से जांच और जल शक्ति मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप कर डायरेक्टर फाइनेंस की नियुक्ति करने की अपील की गई है। फिलहाल, इस पूरे विवाद पर वैपकॉस प्रबंधन या मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।







