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गया में जीतन  की प्रतिष्ठा दाव पर, कुमार सर्वजीत पर पिता की विरासत आगे ले जाने की चुनौती

News Desk by News Desk
April 11, 2024
in राजनीति
गया में जीतनराम की प्रतिष्ठा दाव पर, कुमार सर्वजीत पर पिता की विरासत आगे ले जाने की चुनौती
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पटना, 11 अप्रैल (कड़वा सत्य) बिहार की हाईप्रोफाइल गया (सु) सीट पर इस बार के चुनाव में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन  मांझी की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी कुमार सर्वजीत पर पिता राजेश कुमार की सियासी विरासत को आगे ले जाने की चुनौती है।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में गया (सु) सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल जनता दल यूनाईटेड (जदयू) उम्मीदवार पूर्व सांसद भगवती देवी के पुत्र विजय कुमार मांझी ने महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) प्रत्याशी जीतन   मांझी को पराजित किया था। इस बार के चुनाव में जीतन   मांझी महागठबंधन का साथ छोड़कर राजग के साथ हो गये हैं। राजग में सीटो मे तालमेल के तहत गया (सु) सीट हम प्रत्याशी को मिली है।राजग ने इस चुनाव में गया (सु) सीट पर इमामगंज (सु) के विधायक जीतन   मांझी को उम्मीदवार बनाया है। (हम) प्रत्याशी श्री मांझी गया (सु) सीट पर चौथी बार चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं, इंडियन नेशनल डेमोक्रेटिक इंक्लूसिव अलायंस (इंडी गठबंधन) में शमिल राजद प्रत्याशी और बोधगया (सु) के विधायक कुमार सर्वजीत चुनावी रणभूमि में ताल ठोक रहे हैं। कुमार सर्वजीत स्व. राजेश कुमार के पुत्र हैं, जिन्होंने जीतन  मांझी को वर्ष 1991 के गया (सु) सीट पर हुये लोकसभा चुनाव में पराजित किया था। इस तरह 33 वर्षो के बाद जीतन   मांझी पिता के बाद पुत्र से मुकाबला कर रहे हैं। गया (सु) इस बार के लोकसभा चुनाव में एकमात्र सीट है, जहां दो विधायक जीतन   मांझी और कुमार सर्वजीत के बीच मुकाबला होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में जदयू को यहां से जीत मिली थी, लेकिन इस बार जदयू ने यह सीट श्री मांझी के लिए छोड़ दी। ऐसे में गया (सु) सीट पर जीतन   मांझी के साथ ही नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा भी दाव पर है।
गया (सु) सीट से श्री मांझी ने तीन बार पहले भी अपनी किस्मत आजमायी थी, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में गया संसदीय सीट से जीतन   मांझी ने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा था। इस सीट पर जीतन   मांझी को जनता दल उम्मीदवार राजेश कुमार ने पराजित किया। श्री मांझी ने वर्ष 1991 के बाद 2014 में जनता दल यूनाईटेड (जदयू) के टिकट पर दूसरी बार गया संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भी जीतन   मांझी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद श्री मांझी को वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 1957 में गया संसदीय सीट अस्तित्व में आयी।कांग्रेस के टिकट पर ब्रजेश्वर प्रसाद ने चुनाव लड़ा और विजयी हुये। वर्ष 1962 के चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार ब्रजेश्वर प्रसाद ने जीत हासिल की। श्री प्रसाद पटना के पहले छात्र थे जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत ने ‘नमक सत्याग्रह आंदोलन’ को लेकर गिरफ्तार किया था। श्री प्रसाद ने भारतीय संविधान के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। 1950 में संविधान सभा के सदस्य के रूप में अंतरिम लोकसभा के सदस्य बने। गया सीट को 1967 में आरक्षित किया गया।
वर्ष 1967 में कांग्रेस के   धनी दास ने चुनाव जीता।1971 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनसंघ के टिकट पर ईश्वर चौधरी ने चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश कुमार से यह सीट छीन ली। वर्ष 1977 के चुनाव में ईश्वर चौधरी ने भारतीय लोक दल (बीएलडी) के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी मिश्री सदा को परास्त किया। ईश्वर चौधरी की यह लगतार दूसरी जीत जबकि कांग्रेस के लिये यह लगतार दूसरी हार थी।
वर्ष 1980 के चुनाव में कांग्रेस ने गया (सु) सीट पर फिर वापसी की। कांग्रेस प्रत्यायाी  स्वरूप   ने जनता पार्टी उम्मीदवार ईश्वर चौधरी को पराजित कर कर उन्हें इस सीट पर हैट्रिक बनाने से रोक दिया। वर्ष 1984 के चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी  स्वरूप   ने अपनी पार्टी का परचम लहराया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार ईश्वर चौधरी को दूसरी बार मात दी। इसके बाद से कांग्रेस ने गया (सु) सीट की सियासत पर कभी राज नहीं किया।
वर्ष 1989 में ईश्वर चौधरी ने फिर वापसी की। जनता दल उम्मीदवार ईश्वर चौधरी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) प्रत्याशी जानकी पासवान को पराजित कर एक बार गया सीट अपने नाम कर ली। कांग्रेस प्रत्याशी   स्वरूप   तीसरे नंबर पर रहे। वर्ष 1991 में जनता दल प्रत्याशी राजेश कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार जीतन   मांझी को पराजित किया।
गया के पत्थरों के बीच हुए टंकार की गूंज राष्ट्रीय स्तर तक गयी. इससे निकलीं जिले की दो हस्तियों को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली. इसमें पहली रहीं भागवती देवी, तो दूसरे थे दशरथ मांझी।वर्ष 1996 के चुनाव में जनता दल की भगवती देवी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कृष्ण कुमार चौधरी को पराजित किया। कांग्रेस प्रत्याशी   स्वरूप   तीसरे नंबर पर रहे। भागवती देवी को गया की पहली महिला सांसद होने का गौरव प्राप्त है।उनके बाद इस सीट से किसी भी महिला प्रत्याशी ने जीत हासिल नहीं की है।वर्ष 1998 में भाजपा के कृष्ण कुमार चौधरी ने राजद की भगवती देवी को पराजित कर अपनी हार का बदला लिया और पहली बार इस सीट पर अपनी पार्टी का ‘भगवा’ लहराया। वर्ष 1999 में भाजपा के  जी मांझी ने जनता दल प्रत्याशी राजेश कुमार को मात दी। वर्ष 2004 में राजद के राजेश कुमार मांझी ने भाजपा के बलबीर चांद को पराजित किया। वर्ष 2009 में भाजपा के हरि मांझी ने राजद के  जी मांझी को हराया। वर्ष 2014 में भाजपा के हरि मांझी ने राजद के  जी मांझी को पराजित किया। जदयू उम्मीदवार जीतन   मांझी तीसरे नंबर पर रहे। जदयू ने इस बार का चुनाव राजग गठबंधन से अलग होकर लड़ा था। वर्ष 2019 में जदयू उम्मीदवार विजय कुमार मांझी ने हम प्रत्याशी जीतन   मांझी को पराजित किया।
गया (सु) सीट पर अबतक हुये चुनाव में कांग्रेस ने पांच बार, भाजपा ने चार बार, जनता दल ने तीन बार, राजद, जदयू, भरतीय जनसंघ और बीएलडी ने एक-एक बार जीत हासिल की है।
गया (सु) संसदीय सीट पर हो रहे चुनाव में दोनों राजनेता जीतन   मांझी और कुमार सर्वजीत का राजनीतिक कद काफी बड़ा है और दोनों ही एक-दूसरे को कांटे की टक्कर देने में लगे हुए है।जीतन   मांझी विधायक से लेकर मंत्री होते हुए मुख्यमंत्री के पद तक पहुंच चुके हैं, वही कुमार सर्वजीत विधायक से लेकर पर्यटन मंत्री तक रहे हैं।गया संसदीय सीट में गया के छह विधानसभा क्षेत्र शेरघाटी, बाराचट्टी, बोधगया,गया टाउन, बेलागंज और वजीरगंज शामिल है। शेरघाटी ,बोधगया और बेलागंज पर राजद का कब्जा है। गया टाउन और वजीरगंज में भाजपा जबकि बाराचट्टी में हम का कब्जा हे।इन छह विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 18 लाख 16 हजार 815 है, जिनमें पुरुष मतदाता की संख्या 09 लाख 44 बाजार 230 है, जबकि महिला मतदाता की संख्या 08 लाख 72 हजार 565 है।
गया संसदीय क्षेत्र में हम, राजद, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और सात निर्दलीय समेत 14 प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला जीतन   मांझी और कुमार सर्वजीत के बीच देखा जा रहा है। (हम) के संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन   मांझी इससे पहले गया सु पर तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं और उन्होंने अबतक जीत का स्वाद अब तक नहीं चखा है।मांझी की गया सीट पर अग्निपरीक्षा है। जीतन   मांझी पहली बार राजग के साथ गया सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। जीतन   मांझी को भाजपा, जदयू, लोजपा  विलास और राष्ट्रीय लोक मोर्चा का पूरा समर्थन उनके साथ है। चौथी बार चुनाव मैदान में उतरे जीतन  मांझी के सामने मोक्षनगरी गया में अपनी नैया को पार लगाने की चुनौती है, वहीं राजद उम्मीदवार कुमार सर्वजीत पर अपने पिता की विरासत को आगे ले जाने की चुनौती है। कुमार सर्वजीत के पिता राजेश 33 साल पहले जीतन   मांझी को धूल चटा चुके हैं। इसलिए इस बार गया सीट पर मुकाबला बेहद कड़ा होने की उम्मीद है। हम उम्मीदवार जीतन   मांझी और राजद उम्मीदवार दोनों वर्तमान में विधायक हैं और लोकसभा चुनाव में सांसद बनने के इरादे से जोर-आजमाइश में लगे हुये हैं। देखना दिलचस्प होगा कि क्या चौथी बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे जीतन   मांझी जीत हासिल करते हैं या फिर लोकसभा चुनाव में डेब्यू कर रहे कुमार सर्वजीत जीत का सेहरा अपने नाम कर पिता की विरासत को आगे ले जाते हैं। इस वर्ष19 अप्रैल को होने वाले इन 14 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में लॉक हो जायेगा।
   
कड़वा सत्य

Tags: Biharelections this timeformer Chihigh profile Gaya (Su) seatPatnaआगे ले जाने चुनौतीइस बार चुनावपटनापिता राजेश कुमारपूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझीप्रतिष्ठा दावबिहारवहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रत्याशी कुमार सर्वजीतसियासी विरासतहाईप्रोफाइल गया (सु) सीट
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