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मत्स्य विभाग में ड्रोन टेक्नोलॉजी का होगा इस्तेमाल, ड्रोन मछली पालन और जलचर कृषि के संचालन में ला सकता हैं बदलाव

News Desk by News Desk
October 20, 2024
in देश
मत्स्य विभाग में ड्रोन टेक्नोलॉजी का होगा इस्तेमाल, ड्रोन मछली पालन और जलचर कृषि के संचालन में ला सकता हैं बदलाव
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न्यूज़ डेस्क

ड्रोन प्रौद्योगिकी, अपनी तेजी से विकसित होती क्षमताओं के साथ, कृषि, पर्यावरण निगरानी और आपदा राहत जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई नवोन्मेषी अनुप्रयोग प्रदान करती है। इसके परिवर्तनकारी संभावनाओं को देखते हुए, मत्स्य विभाग सक्रिय रूप से यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि कैसे ड्रोन मछली पालन और जलचर कृषि के संचालन में बदलाव ला सकते हैं, जैसे कि निगरानी और पर्यवेक्षण को बढ़ाना, संसाधनों और फार्म प्रबंधन में सुधार करना, मछली का परिवहन आदि।

ड्रोन प्रौद्योगिकी मछली पालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती है, जिसमें मुख्य गतिविधियाँ जैसे निगरानी, स्टॉक आकलन, पर्यावरणीय निगरानी, रोग पहचान, जल कृषि फार्मों में भोजन वितरित करना, पानी का नमूना लेना और सटीक मछली पकड़ना शामिल हैं। ये सभी गतिविधियाँ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में सहायक हैं, क्योंकि ड्रोन जल गुणवत्ता की निगरानी कर सकते हैं, प्रदूषकों का पता लगा सकते हैं, और हानिकारक शैवाल के फुलने की पहचान कर सकते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में, ड्रोन अत्यधिक मूल्यवान साबित होते हैं। जैसे बाढ़ या तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, ये मछली पालन ढांचे को हुए नुकसान का आकलन करने, खोज और बचाव कार्यों में सहायता करने, और लापता व्यक्तियों या जहाजों को जल्दी और प्रभावी ढंग से खोजने में मदद कर सकते हैं। इस प्रकार, ड्रोन प्रौद्योगिकी मछली पालन क्षेत्र में न केवल दक्षता बढ़ाती है, बल्कि आपदा प्रबंधन में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अंडरवाटर ड्रोन मछलियों के प्राकृतिक आवास में उनके व्यवहार की निगरानी कर सकते हैं, जिससे असामान्य तैराकी पैटर्न या सतह पर सांस लेने जैसी समस्याओं के संकेतों की पहचान करना आसान हो जाता है, और इससे प्रारंभिक रोग पहचान में सहायता मिलती है। उच्च-रिज़ॉल्यूशन ड्रोन इमेजरी मछलियों के शरीर पर रोग के लक्षण, जैसे अल्सर या रक्तस्राव, का पता लगाने में मदद करती है, जिससे समय पर उचित हस्तक्षेप और प्रबंधन संभव होता है।

ड्रोन प्रौद्योगिकी से यह उम्मीद की जा रही है कि यह मछली और मछली उत्पादों के परिवहन में एक अहम भूमिका निभाएगी। यह दूरदराज के क्षेत्रों में मछली और मछली उत्पादों की पहुँच को सरल बनाएगी, जिससे पहुँच की बाधाओं को पार किया जा सके और उच्च गुणवत्ता वाली जीवित मछलियों की त्वरित डिलीवरी संभव हो सके। ताज़ी मछली का परिवहन: ड्रोन का उपयोग करके लैंडिंग केंद्रों से या नावों से सीधे नजदीकी होटलों और रेस्तरां में ताज़ी मछली पहुँचाना।

मछली के भोजन का वितरण: ड्रोन का उपयोग करके जल कृषि बाड़ों और फार्मों में मछली का भोजन वितरित करना, जिससे संचालन की दक्षता में सुधार होता है और श्रम लागत में कमी आती है। आपातकालीन सहायता: समुद्रों और नदियों में आपदाओं के दौरान जल्दी और प्रभावी रूप से जीवन जैकेट वितरित करना, बचाव कार्यों में सहायता करना, और सुरक्षा सुनिश्चित करना।

भारत सरकार का मत्स्य विभाग, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) और ICAR-केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIFRI) के सहयोग से, भारी भार क्षमता वाले ड्रोन का उपयोग करके 100 किलोग्राम ताज़ी मछली का परिवहन तकनीक पर अनुसंधान करेगा। मछली पालन क्षेत्र में ड्रोन प्रौद्योगिकी की संभावनाओं को और अधिक खोजने के लिए, भारत सरकार के मत्स्य विभाग ने ICAR-CIFRI को जीवित मछली परिवहन के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए 1.16 करोड़ रुपये का एक पायलट प्रोजेक्ट आवंटित किया है।

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