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GDP चमकी, नौकरियाँ थमीं: युवाओं का भविष्य अधर में

News Desk by News Desk
January 24, 2026
in संपादकीय
GDP चमकी, नौकरियाँ थमीं: युवाओं का भविष्य अधर में
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अमित पांडे: संपादक

बजट 2025-26 को सरकार ने युवाओं के लिए “ऐतिहासिक” बताते हुए पेश किया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने संसद में घोषणा की कि 1 करोड़ इंटर्नशिप, गिग वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी और MSME निवेश सीमा बढ़ाने जैसे कदम लाखों नौकरियां पैदा करेंगे। लेकिन आंकड़े और ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहते हैं। दिसंबर 2025 तक बेरोजगारी दर 4.8% पर पहुँच गई, शहरी युवाओं में यह 6.7% तक चढ़ गई। लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन मात्र 56.1% पर अटका रहा, जो यह दिखाता है कि बड़ी संख्या में युवा काम की तलाश ही छोड़ चुके हैं।  

RBI ने FY26 के लिए GDP ग्रोथ 6.5% का अनुमान दिया, लेकिन गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा कि “ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितताएं और प्राइवेट कंजम्पशन कमजोर होने से रोजगार सृजन चुनौतीपूर्ण रहेगा।” यह बयान अपने आप में स्वीकारोक्ति है कि उच्च GDP ग्रोथ का मतलब स्वतः रोजगार नहीं है। भारत की ग्रोथ अब “जॉबलेस ग्रोथ” की परिभाषा में फिट बैठती है।  

पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने दावोस में तीखा प्रहार करते हुए कहा कि टैक्स कट्स से समस्या हल नहीं होगी। असली ज़रूरत है प्रभावी सरकारी खर्च और ह्यूमन कैपिटल इन्वेस्टमेंट की। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिस्कल डेफिसिट एक डेट बम बन जाएगा। राजन की चेतावनी इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकार का फोकस राजकोषीय अनुशासन और कॉर्पोरेट टैक्स रियायतों पर है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य और स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश नदारद है।  

लोकसभा में विपक्ष ने बजट को “सूट-बूट वालों का बजट” करार दिया। राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि युवाओं की बेरोजगारी पर कोई ठोस प्लान नहीं है। आर्थिक सर्वेक्षण ने Q2 FY26 में GDP ग्रोथ 8.2% दिखाई, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ मात्र 2.1% रही। यह सबसे बड़ा संकेत है कि उत्पादन आधारित रोजगार नहीं बढ़ रहा। सर्विस सेक्टर की ग्रोथ तो है, लेकिन वह गिग वर्क और अस्थायी नौकरियों तक सीमित है।  

फिस्कल डेफिसिट का टारगेट 4.4% रखा गया, लेकिन राजन के मुताबिक संयुक्त केंद्रीय-राज्य घाटा 8-9% पर अटका हुआ है। यह प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को मार रहा है क्योंकि सरकार के भारी उधार से ब्याज दरें ऊँची बनी रहती हैं। विशेषज्ञ अरुण कुमार ने कहा कि PLI स्कीम में 1.97 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन रोजगार 10 लाख से भी कम पैदा हुआ। यह स्कीम कॉर्पोरेट बैलेंस शीट सुधारने में सफल रही, लेकिन रोजगार सृजन में विफल।  

PLFS डेटा से ग्रामीण बेरोजगारी 4.5% पर है, लेकिन स्किल्ड जॉब्स में जीरो ग्रोथ दर्ज हुई। सरकार का नेशनल मैन्युफैक्चरिंग मिशन, जिसने 25% GDP शेयर का लक्ष्य रखा था, दस साल से लगातार चूक रहा है। बजट में इंटर्नशिप के लिए 2 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, लेकिन स्टाइपेंड 5000-8000 रुपये तय किया गया। महंगाई के मौजूदा स्तर पर यह राशि युवाओं के लिए “पानी” साबित होती है।  

RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में NPA 2.6% पर है, लेकिन MSME लोन रिकवरी केवल 70% रही। इसका मतलब है कि छोटे उद्योगों की हालत अभी भी नाज़ुक है। MSME सेक्टर, जिसे रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है, वित्तीय दबाव में है। जब तक MSME को सस्ती क्रेडिट और स्थिर मांग नहीं मिलेगी, तब तक रोजगार सृजन का दावा खोखला ही रहेगा।  

कुल मिलाकर, आम युवा का सपना टूटा है। मल्होत्रा का कमेंट कि “डोमेस्टिक डिमांड मजबूत है, लेकिन स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स जरूरी हैं” यह स्वीकार करता है कि केवल मांग से रोजगार नहीं बनेगा। स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स का मतलब है शिक्षा में सुधार, स्किलिंग को उद्योग की ज़रूरतों से जोड़ना, और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना। लेकिन इन क्षेत्रों में सरकार की नीतियाँ लगातार असफल रही हैं।  

वादे हवा-हवाई हैं, हकीकत कड़वी है। बजट 2025-26 ने युवाओं को उम्मीद दी थी, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह उम्मीद अब निराशा में बदल चुकी है। बेरोजगारी का काला बादल भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा है। अगर सरकार ने रोजगार सृजन को प्राथमिकता नहीं दी, तो यह बादल आने वाले वर्षों में और घना होगा। भारत की ताक़त उसके युवाओं में है, लेकिन जब वही युवा बेरोजगार हों, तो ताक़त मज़ाक बन जाती है।  

बजट 2025-26 रोजगार के मोर्चे पर फिसड्डी साबित हुआ। GDP ग्रोथ के आँकड़े चमकदार हो सकते हैं, लेकिन जब तक युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक यह ग्रोथ खोखली रहेगी। भारत को केवल “विकास” नहीं, बल्कि “रोजगारयुक्त विकास” चाहिए। वरना यह दशक भी खोखले वादों और अधूरे सपनों में बीत जाएगा।  

Tags: 8th pay commission jobs debateGDP growth IndiaIndian economy employmentjobless growthmanufacturing jobs IndiaMSME employment crisisYouth Unemployment India
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