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“मन की बात” के प्रकाशन में प्रधानमंत्री की भाषा पर सवाल, राजभाषा को रोमन में लाने का प्रयास

News Desk by News Desk
January 29, 2026
in देश
“मन की बात” के प्रकाशन में प्रधानमंत्री की भाषा पर सवाल, राजभाषा को रोमन में लाने का प्रयास
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हरेन्द्र प्रताप की खोजी रपट

नई दिल्ली, 29 जनवरी। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि को प्रभावित किया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण है प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ” मन की बात ” का हिन्दी में प्रकाशन। यह पुस्तक या पुस्तिका केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा मुद्रित की जा रही है। इसमें मन की बात में प्रधानमंत्री के मूल हिन्दी संबोधन को यथावत छापने के चक्कर में राजभाषा की देवनागरी लिपि में रोमन लिपि का भरपूर प्रयोग कर संविधान में अंतर्निहित प्रावधानों की अवहेलना कर दी गई है। जाहिर है कि पाठक यह सोचने पर विवश हो जाएंगे कि अपने उद्बोधन में जगह – जगह पर देवनागरी लिपि की उपेक्षा कर हिन्दी में रोमन लिपि का प्रयोग प्रधानमंत्री ने स्वयं किया है ! तब जबकि सच यह है कि प्रधानमंत्री को पता भी नहीं होगा कि उनके नाम पर क्या – क्या हो रहा है ! इस प्रकाशन ने हिन्दी को लेकर नौकरशाही की उपेक्षा की पोल खोल दी है।

” मन की बात ” के 128वें संस्करण के संबोधन को नवंबर 2025 के अंक में प्रकाशित किया गया है। इसमें 80 पृष्ठों की पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संबोधन 15 पृष्ठों में हिन्दी में प्रकाशित किया गया है।

प्रधानमंत्री के रेडियो संबोधन को हिन्दी में प्रिंट करते समय लगभग हर पृष्ठ पर देवनागरी लिपि के साथ – साथ रोमन लिपि का प्रयोग धड़ल्ले से किया गया है। भारत में सरकारी स्तर पर लिपि की खिचड़ी परोसने का यह एक अनूठा प्रयोग है जो प्रधानमंत्री की ओर से भारतीय संविधान का किया गया उल्लंघन है !

इस संबोधन में हर पृष्ठ पर अंग्रेजी के सरल से सरल शब्दों यथा सेंट्रल हॉल, एयरक्राफ्ट, मेंटेनेंस, रिपेयर, सेक्टर इत्यादि को देवनागरी लिपि के बीच में रोमन लिपि में मुद्रित किया गया है जो न सिर्फ आंखों को चुभता है बल्कि सरकारी स्तर पर भी देवनागरी लिपि को नुकसान पहुंचाने के इरादे को जाहिर करता है।

इस पुस्तक में सिर्फ प्रधानमंत्री के संबोधन में ही यह राजभाषा विरोधी प्रयोग नहीं किया गया है बल्कि अन्य लेखों में भी कहीं – कहीं हिन्दी के बीच में अंग्रेजी शब्दों को रोमन में छापा गया है। इससे यह पता चलता है कि भाषा, राजभाषा, संस्कृति और संविधान को लेकर वर्तमान नौकरशाही कितनी लापरवाह है। प्रधानमंत्री के संबोधन में यदि इस तरह का प्रयोग सार्वजनिक रूप से किया जा रहा है तो हिन्दी के अन्य सरकारी प्रकाशनों में देवनागरी लिपि के साथ क्या हो रहा होगा, इसका अनुमान लगाया जा सकता है।

दिलचस्प तथ्य यह है कि इसी पुस्तक में अंग्रेजी के अनेक तथाकथित कठिन शब्दों जैसे पृष्ठ – 55 पर ‘ प्रथम हाई एल्टीट्यूड अल्ट्रा रन मैराथन ‘ एवं पृष्ठ – 58 पर ‘ वोकल फॉर लोकल ‘ और पृष्ठ – 66 पर एंड्योरेंस को विशुद्ध देवनागरी लिपि में प्रकाशित किया गया है। लेकिन प्रधानमंत्री की लिखित भाषा के साथ दोहरा व्यवहार किया गया है। प्रधानमंत्री की तरफ से हिन्दी संबोधन में उसी वोकल फॉर लोकल को रोमन में मुद्रित किया गया है।

प्रधानमंत्री के नाम पर मन की बात प्रकाशन में यह सब कब से किया जा रहा है, यह अभी जांच का विषय है। ऐसा क्यों किया जा रहा है, यह रिकार्ड पर बताने के लिए मंत्रालय में कोई तैयार नहीं है। हालांकि इसके पीछे अनुबंध पर काम करने वाले लोगों की अज्ञानता, लापरवाही और कामचोरी को मुख्य कारण बताया जा रहा है। हालांकि इन तमाम गड़बड़ियों के लिए पुस्तक की पांडुलिपि के मुद्रण की स्वीकृति देने वाले सक्षम अधिकारी को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है।

Tags: Hindi Language IssueMan Ki Baat ControversyNarendra Modi NewsRajbhasha HindiRoman Script Debate
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