WAPCOS-NPCC Corruption: ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ (The Indian Express) की लेटेस्ट रिपोर्ट ने जल शक्ति मंत्रालय के तहत काम करने वाले PSUs में ‘सिस्टमेटिक करप्शन’ की पोल खोल दी है। WAPCOS लिमिटेड और NPCC द्वारा मामलों को सीधे CBI को रेफर करना इस बात का बड़ा सिग्नल है कि यह सिर्फ कोई इंटरनल गड़बड़ी नहीं बल्कि प्रोजेक्ट, पावर और पैसे का एक बड़ा नेक्सस है जो लंबे समय से ऑपरेट कर रहा था।
सिर्फ केस नहीं, एक बड़े नेक्सस की आहट
रिपोर्ट में सामने आए फैक्ट्स गंभीर सवाल खड़े करते हैं। प्रोजेक्ट्स में टर्नओवर को आर्टिफिशियली बढ़ाकर एलिजिबिलिटी (Eligibility) हासिल करना, सेंसिटिव प्रोजेक्ट्स में डॉक्युमेंट्री हेरफेर और रिश्वत मांगने के रिकॉर्डेड सबूत इस बात का इशारा करते हैं कि यह कोई आइसोलेटेड इंसिडेंट (Isolated Incident) नहीं है। यह एक वेल-प्लांड पैटर्न है जहां रूल्स को बायपास कर ‘सिलेक्टेड’ प्लेयर्स को फायदा पहुंचाया गया है।
रडार पर आए नए नाम और सस्पेक्टेड प्रोजेक्ट्स
विजिलेंस सर्किल्स के इनपुट्स के अनुसार: आरके अग्रवाल, संजय शर्मा और धर्मेंद्र मुदगल के अलावा अब कई नए नाम जांच के रडार पर हैं। इनमें सीमा शर्मा, मनोरंजन पाही, संजय बोहिदार, दीपांक अग्रवाल, रजत जैन, दीपक लखनपाल, अमिताभ त्रिपाठी और सबसे प्रमुख रूप से ‘प्रदीप कुमार’ का नाम सामने आ रहा है।
विजिलेंस की जांच जिन प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर सकती है, उनमें शामिल हैं:
- स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI)
- आयुष (AYUSH)
- ओडिशा के स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट्स
- हरियाणा की यूनिवर्सिटीज
- आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI)
शक है कि इन प्रोजेक्ट्स में कॉम्पिटिशन की बजाय ‘सिफारिश बेस्ड’ सिलेक्शन हुआ और कुछ लिमिटेड कॉन्ट्रैक्टर्स को ही बार-बार ठेके दिए गए।
‘फिक्सर इकोसिस्टम’ और पॉलिटिकल कनेक्शन
जांच में एक नया एंगल इंटरमीडियरी या ‘फिक्सर’ (Fixer) नेटवर्क का सामने आया है, जिसमें सुमिर चावला का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। आरोप है कि प्रोजेक्ट्स में ‘फैसिलिटेशन’ के नाम पर करप्शन का एक पैरेलल नेटवर्क चलाया जा रहा था। चर्चा इस बात की भी है कि प्रदीप कुमार और सुमिर चावला के शिल्पा शिंदे के साथ बेहद करीबी संबंध हैं, जिसकी वजह से इन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो पाती।
सिस्टम की क्लीनिंग या सिर्फ ‘आइसबर्ग का सिरा’?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट शायद उस बड़े ‘आइसबर्ग’ का सिर्फ ऊपरी हिस्सा है। विजिलेंस सिस्टम अभी पूरी तस्वीर सामने लाने की प्रोसेस में है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कार्रवाई असल में पूरे सिस्टम की सफाई करेगी, या फिर सिर्फ कुछ अधिकारियों पर एक्शन लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा।







