पटना, 18 मई। भूमि विवादों के बढ़ते मामलों और लंबित वादों के त्वरित निष्पादन को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिहार भूमि न्यायाधिकरण में सदस्यों की संख्या चार से बढ़ाकर सात कर दी है। इसके साथ ही न्यायाधिकरण में पांच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भी कर दी गई है।
इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य में भूमि विवादों से जुड़े मामलों के समयबद्ध निष्पादन के लिए राज्य सरकार गंभीर है। आम लोगों को शीघ्र न्याय उपलब्ध कराने और भूमि संबंधी मामलों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
राजस्व मंत्री ने कहा कि बिहार भूमि न्यायाधिकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत न्यायाधिकरण के कुल सदस्यों की संख्या पुनर्निर्धारित कर सात की गई है। इससे मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी और लोगों को लंबे समय तक न्याय के लिए प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ेगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री जय सिंह द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय सरकार की स्वीकृति के बाद लिया गया है।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने बिहार भूमि न्यायाधिकरण, पटना में पांच नए न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति भी की है। नियुक्त किए गए सदस्यों में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश किशनगंज मनोज कुमार, सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूर्णिया किशोर प्रसाद, उच्च न्यायालय पटना के अधिवक्ता कुमार नवीनम, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गया रवीन्द्र पटवारी तथा उच्च न्यायालय पटना के अधिवक्ता रविन्द्र राय शामिल हैं।
राजस्व मंत्री डॉ दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार भूमि विवादों के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। न्यायाधिकरण को और अधिक मजबूत एवं सक्षम बनाकर सरकार आम नागरिकों को त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।













