किशनगंज: 125 साल पुराना हुआ लाइन बूढ़ी काली मंदिर, आस्था का ऐसा केंद्र कि 2054 तक बुकिंग फुल
किशनगंज का ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर 125 वर्ष पूरा कर रहा है। जानें इस मंदिर की अनूठी परंपराएं और काली पूजा की तैयारियां।

बिहार के किशनगंज शहर के लाइन मोहल्ला में स्थित ऐतिहासिक लाइन बूढ़ी काली मंदिर इस साल अपनी स्थापना के 125 वर्ष पूरे करने जा रहा है। साल 1902 में स्थापित यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए जाना जाता है, बल्कि सीमांचल के हजारों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र भी है। मंदिर की लोकप्रियता और भक्तों के विश्वास का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां प्रतिमा भेंट करने की बुकिंग साल 2054 तक पूरी हो चुकी है।
आगामी 8 नवंबर को होने वाली वार्षिक काली पूजा और 125वीं वर्षगांठ को लेकर मंदिर परिसर में जबरदस्त उत्साह है। तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और पूरे मंदिर को भव्य तोरण द्वारों और आकर्षक बिजली की रोशनी से सजाया जा रहा है। मंदिर का इतिहास भी बेहद दिलचस्प है; समय के साथ इसका विस्तार हुआ और परिसर में एक भव्य शिव मंदिर की भी प्राण-प्रतिष्ठा की गई।
पीढ़ियों से जारी है पूजा की परंपरा
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि स्थापना के समय से ही एक ही पुजारी परिवार यहां मां काली की सेवा कर रहा है। वर्तमान मुख्य पुजारी मलय मुखर्जी अपने पूर्वजों की विरासत को संभाल रहे हैं और पूरी श्रद्धा के साथ वैदिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना संपन्न कराते हैं।
मंदिर में एक अनूठी परंपरा का पालन किया जाता है, जिसके तहत वार्षिक काली पूजा से ठीक एक दिन पहले पिछले साल की प्रतिमा का विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है और फिर नई प्रतिमा की स्थापना कर उत्सव की शुरुआत होती है।
भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूजा कमेटी ने कतारबद्ध दर्शन की विशेष व्यवस्था की है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में भजन चंद्र पॉल, अमित कुमार दास, मनोज मजुमदार और स्थानीय युवाओं की टीम दिन-रात जुटी हुई है। शहर के प्रबुद्धजन और युवा इस ऐतिहासिक मौके को यादगार बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित हैं।