फ्लाइट में बच्ची की मौत: रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए माता-पिता पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट
लंदन से दिल्ली आ रही 6 साल की बच्ची की मौत के बाद माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की।

लंदन से दिल्ली आ रही एक साढ़े छह साल की मासूम बच्ची की मौत के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। बच्ची के माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें उन्होंने फ्लाइट और एयरपोर्ट के उन सभी रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने, सील करने और कोर्ट में पेश करने की मांग की है, जो इस दुखद घटना से जुड़े हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान लापरवाही बरती गई, जिसके कारण उनकी बेटी की जान चली गई।
घटना 8 सितंबर 2026 की है, जब ज़ैनब मोहम्मदी अपने माता-पिता और भाई के साथ वर्जिन अटलांटिक एयरवेज की फ्लाइट से लंदन से दिल्ली आ रही थी। याचिका में दावा किया गया है कि सफर के दौरान ज़ैनब अचानक बेहोश हो गई। परिजनों का आरोप है कि फ्लाइट में बैटरी न होने की वजह से बच्ची का ब्लड प्रेशर नहीं मापा जा सका और बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाला पीडियाट्रिक कैनुला भी उपलब्ध नहीं था। यहां तक कि फ्लाइट को डायवर्ट करने की विनती भी ठुकरा दी गई।
एयरपोर्ट पर सुविधाओं का अभाव और इलाज में देरी का आरोप
परिजनों का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब फ्लाइट आईजीआई एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर उतरी, तो विमान के पास कोई एम्बुलेंस मौजूद नहीं थी। टर्मिनल 3 की मेडिकल सुविधा में मौजूद डॉक्टर ने बताया कि वहां 12 साल से कम उम्र के बच्चों के इलाज का कोई इंतजाम नहीं है। इसी बीच बच्ची को कार्डियक अरेस्ट आया, जिसके बाद करीब डेढ़ घंटे तक उसे सीपीआर (CPR) दिया गया। इसके बाद उसे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले जाया गया, जहां 16 अक्टूबर को उसकी मृत्यु हो गई।
जस्टिस अमित महाजन ने इस मामले में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए (DGCA), एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, दिल्ली पुलिस और वर्जिन अटलांटिक एयरवेज सहित कई अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि याचिका में बताए गए सभी रिकॉर्ड्स को वर्तमान स्थिति में सुरक्षित रखा जाए।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि फ्लाइट रिकॉर्ड, एयर ट्रैफिक कंट्रोल की रिकॉर्डिंग और टर्मिनल 3 के सीसीटीवी फुटेज ही एकमात्र जरिया हैं जिससे यह पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। चूंकि ये इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स समय के साथ ओवरराइट हो जाते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत सुरक्षित करना जरूरी है। कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 5 फरवरी 2027 के लिए तय की है।