सुपौल: चार नई श्रम संहिताओं पर एक दिवसीय प्रशिक्षण, कामगारों के अधिकारों पर हुई चर्चा
सुपौल में चार नई श्रम संहिताओं को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हुआ, जहां 29 केंद्रीय कानूनों के सरलीकरण और कामगारों के अधिकारों पर चर्चा की गई।

बिहार के सुपौल जिले में शनिवार को संयुक्त श्रम भवन में एक महत्वपूर्ण जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई श्रम संहिताओं के बारे में जानकारी देना और इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाना था। श्रम अधीक्षक सुशील कुमार यादव की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में विभाग के अधिकारियों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण के दौरान राघोपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुबेश कुमार पासवान ने विस्तार से बताया कि सरकार ने पुराने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को मिलाकर अब चार नई श्रम संहिताओं में समाहित कर दिया है। इस कदम का मकसद श्रम व्यवस्था को पहले से अधिक सरल और व्यवस्थित बनाना है। इन चार संहिताओं में मजदूरी (वेतन) संहिता 2019, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020, औद्योगिक संबंध संहिता 2020 और उपजीविकाजन्य सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशाएं संहिता 2020 शामिल हैं।
कामगारों की सुरक्षा और नियोक्ताओं की जिम्मेदारी पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता सच्चिदानंद सुमन ने इस बात पर जोर दिया कि इन नए कानूनों की जानकारी केवल फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे कामगारों, नियोक्ताओं और संबंधित संगठनों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए। प्रशिक्षण सत्र में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा हुई, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल थे:
- वेतन और लाभ: सभी रोजगारों के लिए न्यूनतम वेतन की व्यवस्था, वेतन भुगतान की प्रक्रिया, बोनस, पीएफ, ईएसआईसी, ग्रेच्युटी और मातृत्व लाभ के प्रावधानों की जानकारी दी गई।
- सामाजिक सुरक्षा: गिग वर्कर्स और अन्य कामगारों के लिए सामाजिक सुरक्षा के नए इंतजामों पर बात हुई।
- कार्यस्थल की स्थिति: नियमित स्वास्थ्य जांच, काम के घंटे, कार्यस्थल पर मिलने वाली सुविधाएं और सेवा समाप्ति पर विमुक्ति पत्र (Relieving Letter) जैसे विषयों को समझाया गया।
- कानूनी प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर होने वाली कार्रवाई, ट्रेड यूनियनों की भूमिका, हड़ताल, छंटनी और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की बंदी से जुड़े नियमों पर विस्तार से चर्चा की गई।
इस मौके पर बाल कल्याण समिति के सदस्य आदित्य कुमार चौधरी सहित सुपौल सदर, पिपरा, बसंतपुर, राघोपुर, प्रतापगंज और किशनपुर के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इस पूरे प्रशिक्षण का लक्ष्य प्रतिभागियों को नए कानूनों के प्रावधानों, मजदूरों के अधिकारों और नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों से पूरी तरह अवगत कराना था।