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दिल्ली वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी: त्रिलोकपुरी ऑडिट में खुला राज, राहुल गांधी बोले- यह 'वोट चोरी' है

दिल्ली के त्रिलोकपुरी में वोटर लिस्ट ऑडिट में बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं। राहुल गांधी ने इसे 'वोट चोरी' बताया है, मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

Sonu Nigam· 29 Oct, 2:21 PM · 2 मिनट
दिल्ली वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी: त्रिलोकपुरी ऑडिट में खुला राज, राहुल गांधी बोले- यह 'वोट चोरी' है

राजधानी दिल्ली में वोटर लिस्ट के विशेष गहन संशोधन (SIR) की प्रक्रिया अब एक बड़े विवाद में बदल गई है। पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी में आयोजित एक जनसुनवाई के दौरान चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसने चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिक समाज समूहों द्वारा किए गए एक डोर-टू-डोर ऑडिट में यह बात सामने आई है कि बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से लिस्ट से हटा दिए गए हैं।

मजदूर किसान शक्ति संगठन (MKSS), जन सरोकार, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट विमेन (NFIW) और वोटर अधिकार मंच ने 23 से 26 अक्टूबर 2026 के बीच एक ऑडिट किया था। इस ऑडिट के नतीजे डराने वाले हैं। त्रिलोकपुरी के चार पोलिंग स्टेशनों पर कुल 1,236 नाम हटाए गए थे, जिनमें से 416 नाम पूरी तरह गलत तरीके से हटाए गए। इसका सीधा मतलब है कि हर तीन में से एक वोटर का नाम बिना किसी ठोस वजह के लिस्ट से गायब कर दिया गया।

विपक्ष का हमला और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

इस जनसुनवाई में शामिल हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस पूरी प्रक्रिया को 'वोट चोरी' करार दिया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की आलोचना करते हुए कहा कि चुनाव आयोग इन चिंताओं को दूर करने में विफल रहा है। उनके साथ सीपीआई-एमएल के दीपांकर भट्टाचार्य और स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव जैसे दिग्गज नेता भी मौजूद थे।

इंडिया गठबंधन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए वर्तमान SIR प्रक्रिया को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। गठबंधन का आरोप है कि इस गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर गरीब मजदूरों, किराएदारों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों पर पड़ा है। विरोध स्वरूप 30 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ एक प्रतीकात्मक महाभियोग जैसी कार्रवाई और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में एक बड़ी रैली की योजना बनाई गई है।

इधर, इस मामले ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान भी खींचा है। 28 अक्टूबर 2026 को अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह उन 47 लाख मतदाताओं तक पहुंचने का सिस्टम बनाए जिनके नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से यह तीखा सवाल पूछा कि जो लोग पहले से पंजीकृत वोटर थे, उनसे 'फॉर्म 6' क्यों भरवाया जा रहा है, जबकि यह फॉर्म आमतौर पर नए आवेदकों के लिए होता है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि वह देरी से जमा होने वाले फॉर्म स्वीकार करने और 30 अक्टूबर की समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर रहा है। आयोग का तर्क है कि यह केवल डेटाबेस अपडेट करने की एक प्रक्रिया है, ताकि पात्र मतदाताओं की मदद की जा सके। हालांकि, दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 4 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होनी तय है, जिससे पहले यह विवाद और गहराने के आसार हैं।

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