हरेन्द्र प्रताप की विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 20 फरवरी। दुनिया को करुणा के भूमंडलीकरण की आवश्यकता है जो भारत से पैदा हो सकती है। आज भूमंडलीकरण सिर्फ बाज़ार का नहीं हुआ है बल्कि तमाम बुराइयों का भी हो गया है। संपन्नता बुरी बात नहीं है लेकिन सिर्फ भौतिक संपन्नता सही नहीं है।
ये विचार नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने डॉ. श्याम सिंह शशि स्मृति व्याख्यानमाला- 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में आज यहां व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि दुनिया में पारंपरिक परिभाषाओं की वजह से युद्ध हो रहा है। आज दुनिया जितनी अमीर है, उतनी पहले कभी नहीं थी। इन सब के बावजूद दुनिया आज जल रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. श्याम परांदे ने साहित्यकार स्व. श्याम सिंह शशि के कृतित्व और व्यक्तित्व की प्रशंसा की। इस अवसर पर भारत सरकार के पूर्व रक्षा सचिव एवं राज्य सभा के पूर्व महासचिव डॉ. योगेन्द्र नारायण ने कहा कि ज्ञान का व्यापक महत्व है। यही कारण है कि भारत सरकार इस समय दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का वैश्विक सम्मेलन आयोजित कर रही है। उन्होंने 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए पूछा कि विकसित भारत किस रुप में हो, यह तय करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास यदि भारत की चारित्रिक विशेषताओं के साथ हो तो फिर वह सही है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एएएफटी के संस्थापक एवं कुलाधिपति डॉ. संदीप मारवाह ने डॉ. श्याम सिंह शशि को अपने पिता तुल्य बताते हुए उनके द्वारा सृजित चार सौ से अधिक पुस्तकों को उनकी अविस्मरणीय उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि डॉ. श्याम सिंह शशि करुणा की जीवंत मूर्ति थे और जो भी उनसे एक बार मिल लेता था, वे सदा के लिए उसके दिल में बस जाते थे। डॉ. मारवाह ने कहा कि आज के युग में दो ही चीजें महत्वपूर्ण हैं और ये हैं आपकी भावना और विचारधारा। इसी से आपके व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
प्रथम व्याख्यानमाला में अनेक साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और परिजनों ने भाग लिया। इनमें सुमेधा सत्यार्थी, सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्व. जगदीश चतुर्वेदी की सुपुत्री कवयित्री अनुभूति चतुर्वेदी, आकाशवाणी के पूर्व सहायक निदेशक डॉ. आलोक कुमार सिंह, डॉ. ऋचा सिंह, नारायण कुमार तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के कानूनी सलाहकार डॉ. सतीश चन्द्र गुप्ता प्रमुख हैं। कार्यक्रम का संचालन संस्कृति ने किया। इस अवसर पर बहुमुखी प्रतिभा के धनी साहित्यकार डॉ. श्याम सिंह शशि पर केंद्रित पत्रिका ‘ सभ्यता संस्कृति ‘ का लोकार्पण किया गया।







