कड़ुआ सच काव्य: ग़लतफहमी भी जरूरी होती है !

Aasim4 October 20251 min read0 viewsजीवन मंत्र
कड़ुआ सच काव्य: ग़लतफहमी भी जरूरी होती है !

कभी गलतफहमियां अच्छी होती हैं
नक़ाब उतार फिर चेहरे दिखा देती हैं

जिंदगी यहां ख़ुद एक ग़लतफहमी होती है
सिर्फ जिंदा रहने के लिए जिंदगी होती है

बंटवारे होते हैं कहां यहां ग़लतफहमी से
बंटवारे से गलतफहमियां और भी होती हैं

ग़लतफहमी से सदा ग़लतफहमी होती है
जिंदगी शायद आज अधिक घिरी होती है

ग़लतफहमी से ही राजनीति की रोटी चलती है
आसमां जमीं पे है हर बार ग़लतफहमी होती है

वो तारे तोड़ लाएगा पुरानी ग़लतफहमी होती है
बेहतर उससे,हर शख्स की ग़लतफहमी होती है

जहां में दुश्मन है दोस्त, दोस्त अब कैसा दुश्मन
ग़लतफहमी की जरूरत कभी पूरी नहीं होती है

हरेन्द्र प्रताप
[email protected]

Share:

Comments

Leave a comment