भारत वैश्विक एजेंडा सेट कर रहा हैंः बिरला

Aasim22 January 20242 min read0 viewsदेश

नयी दिल्ली, 21 जनवरी (कड़वा सत्य) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि मौजूदा समय में वैश्विक मंचों पर भारत की साख है और भारत वैश्विक एजेंडा सेट कर रहा हैं।
श्री बिरला ने रविवार को हिन्दू कॉलेज की स्थापना के 125 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि 125 वर्ष पहले जिस कालखंड में इस कॉलेज की स्थापना की गई थी, वह हमारे देश के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण समय था। उन्होंने कहा कि लंबे औपनिवेशिक शासन के कारण देश को ऐसे शैक्षिक संस्थानों की आवश्यकता थी, जो हमारी विरासत से हमारा पुनः परिचय कराए और देशवासियों के अंदर आत्म सम्मान तथा गौरव का संचार करे। उन्होने कहा कि ऐसे समय में महामना मदन मोहन मालवीय ने देश की इस जरूरत को समझा और उसी का परिणाम है कि उन्होंने हमें बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और हिन्दू कॉलेज जैसे संस्थान दिये. जो आज भी अपनी श्रेष्ठता और उच्च मापदंड के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, महामना मदन मोहन मालवीय, सरदार पटेल, लोकमान्य तिलक, जयप्रकाश नारायण जैसे महापुरुषों ने देश को राष्ट्रवाद और एकता की भावना की सीख दी है।
उन्होंने जिक्र किया कि आज भी इस कॉलेज के विद्यार्थी अलग अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, चाहे वह राजनीति हो, न्यायपालिका हो, पत्रकारिता हो, खेलकूद हो, नौकरशाही हो, मनोरंजन हो या उद्यम का क्षेत्र हो। उन्होंने कहा कि हिन्दू कॉलेज का छात्र जहां भी होता है, अपने क्षेत्र का नेता होता है। उनकी क्षमता ने देश का निर्माण किया है, देश के विकास को नई गति दी है।
उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि कॉलेज के अंदर आंतरिक लोकतंत्र का अद्भुत प्रयोग किया जा रहा है। छात्र इकाई को संसद के रूप में जाना जाता है, जिसके अंदर प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद भी व्यवस्था की गयी है और प्रतिपक्ष भी होता है।
लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा को बाजार की आवश्यकता के अनुरूप होने की आवश्यकता बताई जाती है, लेकिन उससे बहुत ज्यादा आवश्यकता इस बात की है कि शिक्षा राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होने छात्रों से कहा कि आज राष्ट्र की उनसे उत्कृष्टता की अपेक्षा है। उन्होने सुझाव दिया की वे जिस भी क्षेत्र में काम करें, पूरी दक्षता और निष्ठा से करें और उनकी आकांक्षाएं राष्ट्र की अपेक्षाओं के अनुरूप हो। उनका काम समाज और राष्ट्र की प्रगति का मार्ग प्रशस्त करे।
संतोष

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