सरकार ने नीतियों में बदलाव करके कोयले में किया भ्रष्टाचार : कांग्रेस

Wasim24 February 20242 min read0 viewsदेश

नयी दिल्ली, 24 फरवरी (कड़वा सत्य) कांग्रेस ने कहा है कि सरकार ने कोयला खदान आवंटन नीति में बदलाव करके दलाली का रास्ता साफ किया है और चहेतों के लिए कोयला खदान आवंटन का काम आसान कर बड़ा भ्रष्टाचार किया है।
कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की नीति को रद्द करके नई कोयला खदान आवंटन की नीति बनाई है। यह ऐसी नीति इस तरह से तैयार की गई थी ईसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गिने-चुने दोस्त ही खदान ले सकते थे।
उन्होंने कहा,"पहले कोयला खदान एंड यूजर लेते थे लेकिन मोदी सरकार ने कहा कि एंड यूजर की अलग- अलग श्रेणी बना दी जाए। यानी जो कंपनी जिस सेक्टर में काम करती है वह उसी सेक्टर में बोली लगा सकती है लेकिन नीलामी में 11 ब्लॉक ऐसे थे जिसमें बेहद कम दाम पर बोली लगी और वो ब्लॉक चले गए। ऐसे में हुआ ये कि सरकार को जितना राजस्व मिलना चाहिए था उससे कहीं कम राजस्व मिला।”
प्रवक्ता ने कहा, "कैग की रिपोर्ट आई कि शेल कंपनियां बनाकर 11 कोयले के ब्लॉक में घपला किया गया। मोदी सरकार के दो मंत्रियों आरके सिंह और राजीव चंद्रशेखर ने चिट्ठी लिखकर सरकार को आगाह किया कि- ये जो नीति है, जिसमें एंड यूजर की श्रेणी बनाई गई हैं इससे भ्रष्टाचार होगा। सरकारी को यह चिट्ठी मिली तो इन दोनों मंत्रियों का प्रमोशन हुआ और ये चुप हो गए। पिछले 10 साल में श्री मोदी की देखरेख में कोयले के नाम पर ये सब हुआ है।"
उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज करते हुए कहा, "श्री मोदी के दो शौक हैं- हवाई यात्रा और हवाई बातें। उन्होंने अपने दोस्त को सिर्फ कोयले की खदान ही नहीं दी बल्कि खदान में माइनिंग का काम भी दे दिया। ऐसे दोस्त भगवान सबको दें।"
उन्होंने सवाल किया, "जब आपके नेता ही चिट्ठी लिखकर भ्रष्टाचार, धांधली और गुटबाजी की बातें आपके सामने रख रहे थे तो उन्हें नजरअंदाज क्यों किया गया। अब सवाल उन दोनों मंत्रियों से भी है कि- आपने ये मुद्दा क्यों नहीं उठाया। कोयले खदान की नीलामी के लिए 2015 में जो संशोधन हुए थे उसमें परिवर्तन क्यों किया गया। एमडीओ वाला नया क्लॉज़ किसे फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया। अगर कोयले के खदान का आवंटन रद्द हुआ तो एमडीओ की कंपनी पहले वाली ही रहेगी, ऐसा क्यों किया गया।"
अभिनव,आशा

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