खबर पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया से जहां बारिश में टापू बना विद्यालय, जान जोखिम में डालकर पढ़ने पहुंच रहे 300 बच्चे पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सीसई की तस्वीर विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। लगातार बारिश के बाद विद्यालय चारों ओर जलजमाव से घिर गया है, जिससे यह पूरी तरह टापू जैसा नजर आ रहा है। विद्यालय के करीब 300 छात्र-छात्राएं और 9 शिक्षक प्रतिदिन एक से दो फीट गंदे पानी को पार कर अपनी जान जोखिम में डालते हुए स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
विद्यालय तक पहुंचने के लिए कोई सुरक्षित सड़क या ऊंचा संपर्क मार्ग नहीं है। छोटे-छोटे बच्चे पानी से होकर गुजरते हैं, जहां कई बार फिसलकर गिर भी चुके हैं। हादसे की आशंका को देखते हुए शिक्षक स्वयं बच्चों को पंक्ति में खड़ा कर उनका हाथ पकड़कर पानी पार कराते हैं, ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से विद्यालय तक पक्की सड़क या सुरक्षित संपर्क मार्ग बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं हुई। हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति बन जाती है और सबसे अधिक परेशानी मासूम बच्चों को झेलनी पड़ती है।
विद्यालय की प्रधान शिक्षिका नीतू कुमारी ने बताया कि इस समस्या से संबंधित विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकल सका है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से शीघ्र सुरक्षित मार्ग का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि बच्चों को शिक्षा के लिए रोजाना अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े। यह तस्वीर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की बदहाल हकीकत को भी उजागर करती है।





