नायडू की याचिका पर सुप्रीम की बड़ी पीठ करेगी फैसला

Wasim16 January 20242 min read0 viewsदेश

नयी दिल्ली, 16 जनवरी (कड़वा सत्य) उच्चतम न्यायालय ने आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की कौशल विकास केंद्रों की स्थापना में 3,300 करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मामले में दर्ज प्राथमिकी रद्द करने की उनकी याचिका पर मंगलवार को विभाजित फैसला सुनाया।
न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने वर्ष 2018 के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 ए की प्रयोज्यता पर निर्णय लेने के लिए एक बड़ी पीठ गठित करने के लिए मामले को शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजने करने का आदेश दिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने श्री नायडू का पक्ष रखते हुए दलील दी थी कि वर्ष1988 के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के 26 जुलाई 2018 को संशोधित अधिनियम के तहत अनिवार्य मंजूरी के बिना उनके मामले में जांच शुरू करना और मुकदमा दर्ज करना अनुचित है।
न्यायमूर्ति बोस ने आदेश सुनाते हुए कहा कि यदि धारा 17 ए के तहत सक्षम प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के बिना कोई पूछताछ और जांच शुरू की गई है, तो इसे अवैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि श्री नायडू के मामले में उनके आदेश से नेता के खिलाफ अनुमति प्राप्त करने का अवसर समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हिरासत आदेश और गिरफ्तारी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने अपनी ओर से कहा कि संशोधन अधिनियम 2018 का उपयोग नए प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचित 26 जुलाई 2018 की तारीख से पहले के अपराधों के लिए अधिकारियों की अनिवार्य मंजूरी लेने के लिए नहीं किया जा सकता है। संशोधन अधिनियम 2018 को संभावित रूप से लागू किया जाएगा, अधिसूचना की तारीख से पहले हुए अपराधों पर नहीं।
उन्होंने कहा कि प्रावधानों का इस्तेमाल बेईमान लोक सेवकों को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं किया जा सकता और यह तारीख से पहले किए गए अपराधों के लिए कार्यवाही को रद्द करने का आधार नहीं होगा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में कौशल विकास केंद्र स्थापित करने से संबंधित अपराध जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा दर्ज 2021 मुकदमा के मामले में आठ सितंबर 2022 को अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय ने 22 सितंबर 2022 को मामले में नौ दिसंबर 2021 को मुकदमा दर्ज करने और उनकी न्यायिक हिरासत के आदेश को रद्द करने से इनकार कर दिया था। श्री नायडू को हालाँकि, पिछले वर्ष नवंबर में नियमित जमानत दे दी गई थी।
बीरेंद्र,आशा

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