बुद्ध की शिक्षाएँ भविष्य के लिए दिशा-निर्देश: धनखड़

Wasim17 January 20241 min read0 viewsदेश

नयी दिल्ली 17 जनवरी (कड़वा सत्य) उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बुद्ध की शिक्षाओं को मौजूदा समय में प्रासंगिक करार देते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, आतंकवाद और गरीबी जैसी समकालीन चुनौतियों से निपटने के लिए बुद्ध के सिद्धांतों की आवश्यकता है।
उपराष्ट्रपति ने बुधवार को यहां एशियाई बौद्ध शांति सम्मेलन (एबीसीपी) की 12वीं महासभा का उद्घाटन करते हुए कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं अतीत के अवशेष नहीं हैं, बल्कि भविष्य के लिए दिशा-निर्देश हैं। उन्होंने कहा कि गौतम बुद्ध का शांति, सद्भाव और सह-अस्तित्व का संदेश नफरत और आतंक की ताकतों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि नैतिक अनिश्चितता के युग में, बुद्ध की शिक्षाएं सभी के लिए स्थिरता, सरलता, संयम और श्रद्धा का मार्ग प्रदान करती हैं। उनके चार आर्य सत्य और अष्टांगिक पथ आंतरिक शांति, करुणा और अहिंसा की ओर ले जाते हैं। ये मौजूदा संघर्षों का सामना कर रहे व्यक्तियों और राष्ट्रों के लिए एक परिवर्तनकारी दिशा निर्देश हैं।
श्री धनखड़ ने सेवा आधारित शासन के भारत के दृष्टिकोण पर बुद्ध की शिक्षाओं के गहरे प्रभाव पर जोर दिया और कहा कि ये सिद्धांत नागरिक कल्याण, समावेशिता और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता देने की देश की प्रतिबद्धता में एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बुद्ध का कालातीत ज्ञान न केवल मनुष्यों के लिए बल्कि जीवित प्राणियों के लिए भी शांति का एक शक्तिशाली, सामंजस्यपूर्ण, संपूर्ण, निर्बाध मार्ग प्रदान करता है।
उपराष्ट्रपति ने जलवायु परिवर्तन, संघर्ष, आतंकवाद और गरीबी जैसी समकालीन चुनौतियों से निपटने में बुद्ध के सिद्धांतों को सार्वभौमिक प्रासंगिकता बताया।
सत्या, यामिनी

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