गन्ना किसानों के मुद्दे पर आर अशोका का कांग्रेस पर हमला, कहा- केंद्र साथ है पर राज्य सरकार चुप

Aasim17 October 20262 min read0 viewsराजनीति
गन्ना किसानों के मुद्दे पर आर अशोका का कांग्रेस पर हमला, कहा- केंद्र साथ है पर राज्य सरकार चुप

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोका ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर गन्ना किसानों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि जहां एक तरफ केंद्र सरकार गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है, वहीं राज्य प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े हुए चुप बैठा है।

आर अशोका ने दावा किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर ठोस निर्णय लिए हैं। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी की पहल पर एक MSP आयोग का गठन किया गया है और किसानों द्वारा submitted की गई सात प्रमुख मांगों को पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

UPA और NDA के दौर की तुलना

बीजेपी नेता ने 2014 से पहले के समय की याद दिलाते हुए कहा कि UPA शासन के दौरान किसानों को गन्ने की आपूर्ति के बाद भुगतान के लिए सालों इंतजार करना पड़ता था और MSP न होने के कारण उन्हें अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ती थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि NDA सरकार आने के बाद UPA समय के करीब 16,600 करोड़ रुपये के बकाया का भुगतान किया गया। साथ ही, FRP की राशि जिसे पहले 30 से 40 रुपये के बीच रखा गया था, उसे बढ़ाकर 2026 तक 365 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुँचाया गया है।

अशोका ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह गन्ने के वजन में होने वाली धोखाधड़ी पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की वजह से यह क्षेत्र एक बड़े उद्योग में बदला है और किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन में चीनी मिलें अलग-अलग दरें वसूल रही हैं और कचरे (waste) के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर बताकर किसानों को ठग रही हैं।

विपक्ष के नेता ने मांग की कि राज्य सरकार को किसानों की मदद के लिए टेस्टिंग लैब स्थापित करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की आलोचना करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अन्य कामों के लिए अक्सर दिल्ली जाते हैं, लेकिन गन्ना किसानों के हक के लिए केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के लिए उन्होंने कोई पहल नहीं की। अशोका के मुताबिक, अगर राज्य सरकार ने किसानों को न्याय दिया होता, तो उन्हें सड़कों पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।

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