अमित पांडे: संपादक
राजनीति में प्रतिशोध और सत्ता का खेल नया नहीं है, लेकिन पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच हालिया घटनाक्रम ने इसे और तीखा बना दिया है। राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज होने के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। पाठक हाल ही में AAP छोड़कर BJP में शामिल हुए थे और अब उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में केस दर्ज होने की खबर ने भाजपा को आक्रामक बना दिया है।
भाजपा का आरोप है कि यह सब राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है। पार्टी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने इसे “वेंडेटा पॉलिटिक्स” करार दिया और कहा कि अगर संदीप पाठक भ्रष्ट थे तो इतने समय तक उन्हें पार्टी में क्यों रखा गया। वहीं, भाजपा नेता तरुण चुग ने इसे पंजाब सरकार की हताशा और निराशा का परिणाम बताया।
AAP के लिए यह घटनाक्रम भी कम गंभीर नहीं है। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों का BJP में जाना उसके लिए बड़ा झटका है। खासकर पंजाब में, जहां AAP की ताकत अब कमजोर होती दिख रही है। राघव चड्ढा, स्वाती मालीवाल, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी, हरभजन सिंह और अशोक मित्तल जैसे नामों का जाना पार्टी की साख पर असर डाल रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में एजेंसियों और राज्य मशीनरी के इस्तेमाल की नई मिसाल है। अब तक BJP पर आरोप लगता रहा कि वह ED, CBI और आयकर विभाग जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए करती है। लेकिन पंजाब में AAP ने भी उसी तर्ज पर जवाबी हमला किया है।
पंजाब पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सरकारी सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तारी की तैयारी चल रही है। यह स्थिति न केवल संदीप पाठक बल्कि अन्य नेताओं के लिए भी चिंता का कारण है, जो हाल ही में AAP छोड़कर BJP में गए हैं। राजिंदर गुप्ता के ट्राइडेंट ग्रुप पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रेड को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में हालिया घटनाक्रम ने माहौल को गरमा दिया है। आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के खिलाफ दो एफआईआर दर्ज होने से सियासी हलचल तेज हो गई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार ये मामले गैर-जमानती धाराओं में दर्ज किए गए हैं और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा ने इसे प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने कहा कि अगर पाठक भ्रष्ट थे तो इतने समय तक उन्हें पार्टी में क्यों रखा गया। तरुण चुग ने इसे पंजाब सरकार की हताशा का परिणाम बताया। वहीं, AAP के लिए यह घटनाक्रम भी गंभीर है क्योंकि सात राज्यसभा सांसदों का BJP में जाना उसकी ताकत को कमजोर करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में एजेंसियों और राज्य मशीनरी के इस्तेमाल की नई मिसाल है। अब तक भाजपा पर आरोप लगता रहा कि वह ED, CBI और आयकर विभाग जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए करती है। लेकिन पंजाब में AAP ने भी उसी तर्ज पर जवाबी हमला किया है।
यह मामला केवल कानूनी कार्रवाई नहीं बल्कि भारतीय राजनीति में प्रतिशोध की नई परिभाषा है। नागरिकों के लिए चिंता का विषय यह है कि जब सत्ता और विपक्ष दोनों ही संस्थाओं का इस्तेमाल एक-दूसरे को दबाने के लिए करते हैं, तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होती है। संदीप पाठक प्रकरण इसी विडंबना का प्रतीक है।
इस पूरे घटनाक्रम का असर पंजाब चुनावों पर पड़ना तय है। AAP की राज्यसभा में ताकत घटकर तीन रह गई है और BJP इसे अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल करेगी। वहीं AAP यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी छोड़ने वालों को आसानी से नहीं छोड़ा जाएगा।
राजनीति का यह खेल नागरिकों के लिए चिंता का विषय है। जब सत्ता और विपक्ष दोनों ही संस्थाओं का इस्तेमाल एक-दूसरे को दबाने के लिए करते हैं, तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होती है। संदीप पाठक प्रकरण इस बात का प्रतीक है कि भारतीय राजनीति में अब विचारधारा से ज्यादा सत्ता का गणित और प्रतिशोध का खेल हावी हो गया है।













