नई दिल्ली: टर्मिनेटेड WAPCOS CMD Rajnikant Agarwal रजनीकांत अग्रवाल के खिलाफ दर्ज CBI FIR ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि पहले की शिकायतों, विजिलेंस रिकॉर्ड्स और राजस्थान FIR में जिन लोगों के नाम स्पष्ट रूप से सामने आए थे, उनमें से कई नामों को CBI FIR में प्रमुखता से शामिल नहीं किया गया।
RC2162026A0005 संख्या की यह FIR, दिनांक 30 अप्रैल 2026, IPC की धारा 120-B तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 11 के तहत दर्ज की गई है। FIR में रजनीकांत अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अवैध लाभ लेने के आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि आलोचकों का कहना है कि FIR में उस बड़े कथित षड्यंत्र को कमजोर कर दिया गया है, जिसका उल्लेख पहले की शिकायतों में किया गया था। इन शिकायतों में फर्जी वापसी पत्र (Withdrawal Letters), व्हिसलब्लोअर्स को डराने-धमकाने और शिकायतों को दबाने के आरोप शामिल थे।
शिकायत रिकॉर्ड्स के अनुसार, कथित रूप से फर्जी वापसी पत्र मनीषा धनखड़ द्वारा सुमिर चावला के मार्गदर्शन में तैयार किए गए। आरोप है कि शिकायतकर्ताओं के फर्जी हस्ताक्षर इन पत्रों पर लगाए गए ताकि यह दिखाया जा सके कि वरिष्ठ WAPCOS अधिकारियों के खिलाफ की गई शिकायतें वापस ले ली गई हैं।
आरोप यह भी है कि इन दस्तावेजों को तत्कालीन चीफ इंजीनियर (विजिलेंस) संजय बोहिदार द्वारा बिना किसी सत्यापन के स्वीकार कर लिया गया, जिससे WAPCOS की विजिलेंस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिकायत सामग्री में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवतार सिंह ने मुख्य शिकायतकर्ता को डराने-धमकाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि सुमिर चावला ने रजनीकांत अग्रवाल के प्रभाव और आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर शिकायतों को दबाने और पूरे मामले को “मैनेज” करने का प्रयास किया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि राजस्थान के झुंझुनूं जिले के थाना गुढ़ा में दर्ज FIR संख्या 51/2023, जो IPC की धारा 420, 506 और 120-B के तहत दर्ज हुई थी, उसमें पहले ही निम्नलिखित नाम शामिल थे:
- रजनीकांत अग्रवाल
- सुमिर चावला
- संजय बोहिदार
- अवतार सिंह
- मनीषा धनखड़
- और संजू
इन सभी पर फर्जी वापसी पत्र, धमकी और साजिश से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब ये नाम पहले से शिकायतों और राजस्थान FIR में मौजूद थे, तो CBI FIR में इन्हें प्रमुखता से क्यों नहीं शामिल किया गया।
विवाद उस समय और गहरा गया जब आरोप सामने आए कि WAPCOS और NPCC से जुड़े ठेकेदारों से प्राप्त कथित अवैध लाभ, रजनीकांत अग्रवाल की पत्नी दीप्ति अग्रवाल से जुड़े खातों के माध्यम से पहुंचाए गए।
साथ ही, मानन अग्रवाल को कथित अपराध की आय (Proceeds of Crime) से लाभ मिलने के आरोप भी चर्चा में हैं। आरोप है कि कॉलेज फीस, हॉस्टल फीस और हवाई यात्रा खर्च जैसे भुगतान WAPCOS से जुड़े ठेकेदारों और बिचौलियों के माध्यम से किए गए।
जांच एजेंसियों के भीतर रजनीकांत अग्रवाल और उनके परिवार की विदेश यात्राओं की भी जांच की मांग उठ रही है, जिसमें इन यात्राओं के खर्च, फंडिंग स्रोत और संभावित ठेकेदार कनेक्शन की जांच की बात कही जा रही है।
आलोचकों का कहना है कि मामला अब केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसमें फर्जीवाड़ा, सबूतों की हेराफेरी, व्हिसलब्लोअर्स को डराना, विजिलेंस तंत्र का दुरुपयोग और प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए शिकायतों को दबाने जैसे गंभीर आरोप शामिल हो गए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या CBI जांच का दायरा बढ़ाकर उस पूरे नेटवर्क की जांच करेगी, जो कथित रूप से रजनीकांत अग्रवाल के आसपास सक्रिय था, और क्या फर्जी वापसी पत्रों तथा पहले से नामित सभी व्यक्तियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच होगी।










