कम लागत में अधिक मुनाफा देगा मड़ुआ, कटिहार के बखरी में हुआ फसल कटनी प्रयोग
कटिहार के बखरी में मड़ुआ फसल का वैज्ञानिक कटनी प्रयोग हुआ। जानें कैसे यह पोषक फसल किसानों की आय बढ़ाएगी और सेहत के लिए क्यों है फायदेमंद।

बिहार के कटिहार जिले में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें पौष्टिक फसलों की ओर मोड़ने के लिए एक खास पहल की गई है। रविवार को राजकीय बीज गुणन प्रक्षेत्र, बखरी में मड़ुआ (रागी) की फसल का वैज्ञानिक तरीके से कटनी प्रयोग संपन्न हुआ। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) राजीव कुमार और कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रति इकाई क्षेत्र में वास्तव में कितनी पैदावार हो रही है।
इस प्रयोग के लिए 50 वर्गमीटर (10 मीटर गुणा 5 मीटर) का एक विशेष क्षेत्र चिन्हित किया गया था। वैज्ञानिक पद्धति से फसल की कटाई कर आंकड़ों को एकत्र किया गया, ताकि भविष्य में उत्पादन के अनुमानों को सटीक बनाया जा सके और किसानों को सही मार्गदर्शन दिया जा सके।
सेहत का खजाना और कमाई का जरिया है रागी
इस मौके पर जिला कृषि पदाधिकारी राजीव कुमार ने मड़ुआ की खूबियों पर चर्चा करते हुए इसे भविष्य की खेती का आधार बताया। उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और पानी की कमी के दौर में मड़ुआ एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि यह सूखा प्रतिरोधी फसल है और इसे उगाने में लागत बहुत कम आती है।
स्वास्थ्य के नजरिए से मड़ुआ के फायदों को गिनाते हुए उन्होंने बताया कि:
- यह कैल्शियम, आयरन और डाइटरी फाइबर से भरपूर होता है।
- यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन मुक्त है, जो इसे मधुमेह (डायबिटीज) के रोगियों के लिए रामबाण बनाता है।
- किसान अब केवल अनाज ही नहीं, बल्कि इससे आटा, सत्तू, बिस्कुट, लड्डू और हलवा जैसे वैल्यू एडेड उत्पाद बनाकर बाजार में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
डीएओ ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे अपनी खेती में विविधता लाएं और मोटे अनाजों (मिलेट्स) को प्राथमिकता दें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि किसान प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करें और समय पर बुवाई व सही उर्वरक प्रबंधन अपनाएं, तो वे कम खर्च में बेहतर कमाई कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में कृषि अभियंत्रण के उप निदेशक सहित अनुमंडल और प्रखंड स्तर के कई कृषि पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे।