दिल्ली से करनाल का सफर अब होगा आसान कॉरिडोर का रास्ता साफ, अब तेजी से दौड़ेगी ट्रेन
दिल्ली से करनाल का सफर अब होगा आसान। नमो भारत कॉरिडोर के लिए बिजली लाइनों को हटाने का समझौता हुआ, जिससे निर्माण कार्य में आएगी तेजी।

दिल्ली से हरियाणा के पानीपत और करनाल जाने वाले यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के निर्माण में आने वाली एक बड़ी बाधा अब दूर हो गई है। नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) और टाटा पावर-DDL के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) हुआ है, जिसके बाद अब इस प्रोजेक्ट के निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
इस समझौते के तहत प्रोजेक्ट के रास्ते में आने वाली 38 एक्स्ट्रा-हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों (765, 400, 132 और 66 kV) को शिफ्ट किया जाएगा। इस काम में BSES, UHBVNL, HVPNL और पावर ग्रिड जैसी एजेंसियां भी शामिल हैं। लक्ष्य यह है कि काम शुरू होने के एक साल के भीतर इन सभी यूटिलिटी लाइनों को हटा दिया जाए। इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी केंद्र सरकार के PMG पोर्टल के जरिए की जा रही है ताकि काम में कोई देरी न हो।
सफर होगा आसान, 90 मिनट में पहुंचेंगे करनाल
करीब 136.3 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की कुल लागत 33,051 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें हरियाणा सरकार लगभग 7,472 करोड़ रुपये का योगदान दे रही है। यह रूट दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर नरेला, कुंडली, सोनीपत और गन्नौर होते हुए पानीपत और करनाल तक जाएगा।
इस प्रोजेक्ट की कुछ खास बातें इस प्रकार हैं:
- समय की बचत: दिल्ली से करनाल की दूरी अब मात्र 90 मिनट में तय होगी, जबकि पानीपत पहुंचने में केवल 45 से 50 मिनट लगेंगे।
- स्टेशनों का जाल: पूरे रूट पर 21 स्टेशन होंगे, जिनमें समालखा, सिवाह बस स्टैंड और पानीपत सिटी जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं।
- इंजीनियरिंग डिजाइन: इस कॉरिडोर का 124.82 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड (ऊपर) होगा और 11.48 किलोमीटर हिस्सा अंडरग्राउंड बनाया जाएगा।
- कनेक्टिविटी: यह सिस्टम सराय काले खां के जरिए दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ और दिल्ली-गुरुग्राम-SNB लाइनों से पूरी तरह जुड़ा होगा, जिससे यात्रियों को एक कॉरिडोर से दूसरे में जाने में आसानी होगी।
हरियाणा सरकार ने मार्च 2026 में अपनी ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) पॉलिसी के तहत इसे मंजूरी दी थी। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार सीधे जमीन खरीदने का तरीका अपना रही है। जियोटेक्निकल जांच पूरी हो चुकी है और अधिकारियों का लक्ष्य है कि साल 2031 तक इस शानदार सेवा को आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाए।