औरंगाबाद: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने के उद्देश्य पर औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड की बौर पंचायत अंतर्गत बहादुरपुर गांव से गंभीर सवाल उठे हैं। वार्ड संख्या-5 की दो महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उनके नाम पर गैस कनेक्शन तो सक्रिय है और बैंक खाते में सब्सिडी भी आती रही, लेकिन उन्हें आज तक न गैस सिलेंडर मिला और न ही उपभोक्ता पासबुक या अन्य आवश्यक दस्तावेज।
बहादुरपुर निवासी बन्धु यादव की पत्नी शांति देवी और अमित कुमार की पत्नी पूनम देवी ने बताया कि लगभग पांच वर्ष पहले गांव में उज्ज्वला योजना के तहत आवेदन भरवाया गया था। उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि सरकार की योजना के अंतर्गत मुफ्त गैस कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी उन्हें गैस सिलेंडर नहीं मिला।
महिलाओं का कहना है कि सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उनके बैंक खातों में गैस सब्सिडी की राशि आती रही, जिससे यह प्रतीत होता है कि उनके नाम पर गैस कनेक्शन जारी है।उनका आरोप है कि संभवतः उनके नाम पर नियमित रूप से गैस सिलेंडर की आपूर्ति भी दिखाई जा रही है, जबकि उन्होंने आज तक एक भी सिलेंडर प्राप्त नहीं किया।पीड़ित महिलाओं ने बताया कि जब वे अपनी शिकायत लेकर भदवा स्थित इंडियन गैस एजेंसी पहुंचीं तो उन्हें स्पष्ट जानकारी देने के बजाय टालमटोल कर वापस भेज दिया गया।
इससे उनके मन में पूरे मामले को लेकर संदेह और गहरा हो गया।यदि महिलाओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि सरकारी योजना में गंभीर अनियमितता और गरीब लाभुकों के अधिकारों के हनन का मामला हो सकता है। ऐसे में कई अहम सवाल खड़े होते हैं,बिना लाभुक को सिलेंडर दिए उसके नाम पर गैस की बुकिंग और वितरण कैसे हुआ? एजेंसी के रिकॉर्ड में सिलेंडर किसे और किस पहचान के आधार पर दिया गया? क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा कभी इसकी जांच की गई?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी ने फर्जी तरीके से लाभुकों के नाम पर गैस सिलेंडर उठाया है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।





