महासमुंद: अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय सरायपाली ने पास्को एक्ट के एक मामले में आरोपी दीपक देवांगन को दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी दीपक देवांगन, पिता खगेश देवांगन, निवासी भंवरपुर, तहसील बसना पर नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म करने और अश्लील वीडियो वायरल कर उसे मानसिक पीड़ा पहुंचाने का आरोप था।
मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पास्को सरायपाली वंदना दीपक देवांगन ने आरोपी को दोषी माना। न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे कठोर दंड से दंडित किया है।
घटना का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है कि पीड़िता ने थाना बसना में रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपी दीपक देवांगन उसके मोहल्ले में रहता है। करीब तीन वर्ष पूर्व आरोपी ने पीड़िता से मोबाइल नंबर लेकर व्हाट्सएप और फोन कॉल के माध्यम से बातचीत शुरू की। आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता को बहला-फुसलाया और उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता द्वारा विरोध करने पर आरोपी ने घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।
आरोप है कि आरोपी ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल में बना लिया था। बाद में उसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैकमेल किया और उसकी इच्छा के विरुद्ध बार-बार शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालता रहा। पीड़िता के अनुसार, आरोपी ने वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसका लगातार शोषण किया।
पीड़िता द्वारा आरोपी से मिलने से इनकार करने पर आरोपी ने अपने मोबाइल में बनाया गया अश्लील वीडियो व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर वायरल कर दिया। घटना से परेशान होकर पीड़िता के परिजनों ने आरोपी के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर थाना बसना में 22 अप्रैल 2025 को अपराध क्रमांक 167/2025 के तहत धारा 376(2)(n), 377, 506 बी, 509 बी भादंसं तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 4/6 के तहत मामला दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67, 67ए एवं 67बी भी जोड़ी गई।
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीओपी सरायपाली द्वारा स्वयं विवेचना की गई। विवेचना के दौरान गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर प्रसारित वीडियो का प्रोसेसिंग प्रयोगशाला से परीक्षण कराया गया। सभी आवश्यक तकनीकी एवं अन्य साक्ष्यों को संकलित कर निर्धारित समयावधि में चालान माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।





